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रेत माफियाओं के सामने नतमस्तक व्यवस्था? पत्रकार की शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं, पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल*................NN81



*पौनी घाट से अवैध रेत उत्खनन, पत्रकार को ट्रैक्टर से कुचलने के प्रयास, माफियाओं के बढ़ते आतंक से दहशत*


जिले के लांजी क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का खेल अब इतना बेलगाम होता दिखाई दे रहा है कि कानून का भय मानो पूरी तरह समाप्त हो चुका है। रेत माफियाओ की दंबगई इतनी बढ़ गई है कि वे अब बेखौफ होकर पुलिस, पत्रकार को भी कुचलने से नही चूक रहे है। पत्रकार पवन कश्यप द्वारा की गई शिकायत ने न केवल रेत माफियाओं के बढ़ते दुस्साहस को उजागर किया है, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार 5 जून की रात पौनी नदी घाट से ट्रैक्टर की लाइट बंद कर अवैध रूप से रेत निकाली जा रही थी। इसी दौरान पत्रकार पवन कश्यप द्वारा रेत से भरे ट्रैक्टर को रोकने का प्रयास करने पर चालक अंकित नागवंशी द्वारा उन्हें ट्रैक्टर से कुचलने का प्रयास किया गया।

*ट्रैक्टर से कुचलते का प्रयास के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?*

इस संबंध में पवन कश्यप ने बताया कि उक्त ट्रेक्टर चालक द्वारा पौनी नदी घाट से रेत हरदोही परसवाड़ा के रास्ते दुल्हापुर पंचायत में चल रहे सीसी रोड़ निर्माण कार्य में ले जायी जा रही थी। घटना की जानकारी उसी रात थाना लांजी पुलिस को दी गई, लेकिन तत्काल एफआईआर दर्ज करने के बजाय अगले दिन आने को कहा गया। जब वे अगले दिन थाने गये तब भी मामले में अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई गई। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि एक पत्रकार द्वारा जानलेवा हमले की शिकायत की जाती है तो उस पर तत्काल कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं होती? यह मामला अब आमजन के बीच चर्चा का विषय बन चुका है और लोग पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल उठा रहे हैं।

*50 से अधिक ट्रैक्टरों से हो रहा परिवहन*

लांजी क्षेत्र में लंबे समय से अवैध रेत कारोबार को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि क्षेत्र में 50 से अधिक ट्रैक्टर रेत परिवहन में लगे हुए हैं। वहीं कुछ सूत्रों द्वारा पुलिस और अवैध कारोबारियों के बीच कथित सांठगांठ के आरोप भी लगाए जा रहे हैं, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार रेत माफियाओ द्वारा पुलिस से सांठगांठ कर ली गई है जिसके चलते वे बेखौफ होकर कारोबार को अंजाम दे रहे है। सूत्र तो यह भी बता रहे है कि रेत माफियाओ द्वारा पुलिस को एक ट्रेक्टर के महीने का 15 हजार रूपये दिया जाता है ताकि बेखौनऊ होकर रेत का उत्खनन और परिवहन कर सके।

*रेत माफियाओं से अब पुलिस और पत्रकार भी सुरक्षित नहीं*

स्थानीय लोगों का कहना है कि मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से जुड़े कथित खनिज माफियाओं का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। कुछ दिन पूर्व लालबर्रा क्षेत्र में भी रेत परिवहन से जुड़े विवाद ने सुर्खियां बटोरी थीं। जहां पुलिस के एक हेडकांस्टेबल को ट्रेक्टर से कुचलकर जान से मारने का प्रयास किया गया। अब हालात यहां तक हो गये है कि रेत माफियाओ से पुलिस और पत्रकार भी सुरक्षित नही है। अब क्षेत्रवासियों ने जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है, ताकि कानून व्यवस्था पर जनता का भरोसा कायम रह सके।

खेमराज सिंह बनाफरे 


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