राज्य सरकार की बजट घोषणा की अनुपालना में कृषि विभाग द्वारा वर्ष 2026-27 में किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) के अंतर्गत जिले में क्लस्टर आधारित मॉडल पर नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के छिड़काव पर किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान प्रदान किया जाएगा। अनुदान राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में जमा की जाएगी।
संयुक्त निदेशक कृषि विनोद कुमार जैन ने बताया कि कृषि आयुक्तालय जयपुर के निर्देशानुसार खरीफ एवं रबी दोनों सीजन में नैनो उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करना, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार लाना तथा किसानों की उत्पादन लागत घटाना है।
जिले को नैनो यूरिया के 482 हेक्टेयर तथा नैनो डीएपी के 337 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रदर्शन आयोजित करने का लक्ष्य मिला है। सहायक निदेशक डॉ. धीरेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि छिड़काव कार्य ट्रैक्टर माउंटेड स्प्रेयर, बैटरी संचालित स्प्रेयर तथा ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीकों से किया जा सकेगा।
योजना के तहत नैनो यूरिया के लिए प्रति हेक्टेयर लागत 2000 रुपये निर्धारित की गई है, जिस पर किसानों को 1000 रुपये का अनुदान मिलेगा। वहीं नैनो डीएपी के लिए प्रति हेक्टेयर लागत 2900 रुपये तय की गई है, जिस पर 1450 रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी।
कृषि अधिकारी कजोड़ मल गुर्जर ने बताया कि योजना के अंतर्गत रबी की गेहूं, जौ, सरसों, चना एवं जीरा तथा खरीफ की बाजरा, मक्का, सोयाबीन और मूंगफली जैसी फसलों को शामिल किया गया है। प्रत्येक किसान के लिए प्रदर्शन क्षेत्र की सीमा 0.4 हेक्टेयर से 10 हेक्टेयर तक निर्धारित की गई है।
उन्होंने बताया कि स्थानीय स्तर पर कम से कम 10 किसानों का एक प्रदर्शन क्लस्टर बनाया जाएगा। छिड़काव कार्य कृषि पर्यवेक्षक एवं सहायक कृषि अधिकारी की निगरानी में होगा तथा भौतिक सत्यापन के बाद ही किसानों के खातों में अनुदान राशि जारी की जाएगी।
