महज वन विभाग के मुख्यालय से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर आम के हरे-भरे पेड़ों की खुलेआम कटाई और तस्करी का मामला सामने आ रहा है। परलकोट क्षेत्र में लगातार पेड़ों की बलि दी जा रही है। आरोप है कि गांव-गांव में तस्कर दिनदहाड़े आम के पेड़ काटकर ट्रकों में लोडिंग कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को इसकी भनक तक नहीं है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब कोई ग्रामीण सूखी लकड़ी या जलाऊ लकड़ी लेकर जाता है तो वन विभाग तत्काल कार्रवाई करता है, लेकिन बड़े पैमाने पर हो रही पेड़ों की कटाई पर विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
ग्रामीणों के अनुसार पीवी-29 में एक व्यक्ति द्वारा आम के पेड़ों की कटाई कर तस्करी किए जाने की चर्चा है। बताया जा रहा है कि आज भी कई स्थानों पर लकड़ियों की लोडिंग जारी है। वहीं क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत और कथित कमीशनखोरी के कारण कार्रवाई नहीं हो रही है।
हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले में वन विभाग का पक्ष सामने आना बाकी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह वन संपदा के संरक्षण पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
