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पिपरिया ग्रा.प. में स्थायी ग्रा.प. अधिकारी की नियुक्ति की मांग...........NN81



*जी.प. सीईओ सहित विधायक को सौपा ज्ञापन*

*31 मई तक मांग पूरी नहीं हुई तो 01 जून को ग्राम पंचायत को जड़ेंगे ताला*


*सरपंच गुणाराम मेहर के नेतृत्व में होगा आंदोलन*

सालेकसा तहसील ही नहीं अपीतू संपूर्ण आमगांव-देवरी विधानसभा क्षेत्र में जनसंख्या व क्षेत्रफल की दृष्टि से सबसे बड़ी ग्राम पंचायत होने का सम्मान प्राप्त,अति संवेदनशील,नक्सल प्रभावित वह आदिवासी भू-भाग के नाम से ख्याति प्राप्त पिपरिया ग्राम पंचायत में तत्कालीन ग्राम पंचायत अधिकारी रत्नाकर घरत के निलंबन के पश्चात यहां का प्रभार कावराबांध ग्राम पंचायत अधिकारी किशोर वैष्णव को सौपा गया है। यहां की भौगोलिक स्थिति एवं जनता की समस्याओं को देखते हुए यहां स्थायी ग्राम पंचायत अधिकारी नियुक्त करने की मांग विगत साल भर से चल रही है परंतु जी.प. प्रशासन की ओर से आज-कल कर टाल-मटोल किया जा रहा है. जी.प. प्रशासन की इस नीति का संज्ञान लेते हुए सरपंच गुणाराम मेहर ने अपने सहयोगियों के साथ अब इस मांग को लेकर "ताला ठोको आंदोलन" करने का फैसला किया है। तत्संबंध का लिखित ज्ञापन उन्होंने गोंदिया जी.प.सीईओ,सालेकसा पुलिस निरीक्षक,खंड विकास अधिकारी सालेकसा व स्थानीय विधायक संजय पुराम को सौपा है। उन्होंने जी.प. प्रशासन को इस मांग को पूरी करने हेतु भरपूर कलावधी दी है। 31 मई तक मांग पूरी नहीं होने पर 01 जून सोमवार को ठीक 12:00 बजे ग्रा.प. कार्यालय को ताला जड़कर चाबी खंड विकास अधिकारी को सौंपने की उन्होंने ज्ञापन में चेतावनी दी है।

    उन्होंने अपनी मांग को लेकर स्पष्ट किया की सन 2011 की जनगणना के मुताबिक ग्राम पंचायत की जनसंख्या छः हजार के आसपास है जिसमें 3 राजस्व गांव और 18 टोलो का समावेश है जो कि वर्तमान में जनसंख्या दस हजार के आसपास हो चुकी हैं। यहां प्रभारी ग्राम पंचायत अधिकारी द्वारा सप्ताह में दो दिन काम के नियुक्त किए गए हैं जिनमें पूरे दो दिन उन्हें कभी भी ग्राम पंचायत में पाया नहीं गया। कोई ना कोई शासकीय काम बीच में आ जाने से कभी-कभी तो सप्ताह में एक दिन भी पिपरिया को वे नहीं दे पाते। बाकी जरूरी कार्य हेतु उनसे मिलने कावराबांध मुख्यालय जाना पड़ता है या तो सालेकसा प.स. में। 

      आगामी जून माह से शैक्षणिक सत्र 2026- 27 का प्रारंभ होना तय हैं ऐसे समय विद्यार्थियों-पालकों को अनेक महत्वपूर्ण दस्तावेज की आवश्यकता होती है. ग्राम पंचायत अधिकारी की अनुपस्थिति का प्रभाव यहां के विकास कार्य सहित जनता पर पड़ता है और जनता का गुस्सा अपने जनप्रतिनिधियों पर फूटता है। जनता के आक्रोश को देखते हुए अब मांग पूरी करवाने हेतु आंदोलन करने की  भूमिका लेने पर मजबूर होने की बात गुणाराम मेहर ने ज्ञापन में अंकित की है। 

       अब देखना यह है कि अब प्रशासन गुणाराम मेहर को आंदोलन करने पर मजबूर करता है अथवा समय के पूर्व मांग पूरी कर दी जाती है। बता दे कि इसके पूर्व गुणाराम मेहर ने जनहित की मांगों को लेकर अनेक आंदोलन किए हैं और उन्हें सफलता भी मिली है। किंतु यह "ताला ठोको आंदोलन" कितना प्रभावशाली होगा इस ओर संपूर्ण सालेकसा तहसील की निगाहें टिकी हुई है।


सऺवाददाता  

मुमताज अली सैय्यद 

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