रौन जनपद पंचायत कार्यालय में मरम्मत के नाम पर ‘लीपापोती’? 15 दिन में उखड़ी टाइल्स ने खोली भ्रष्टाचार की परतें!
ठेकेदार-अधिकारियों की कथित मिलीभगत पर उठे सवाल, जनता बोली — ‘जब जनपद दफ्तर ही नहीं संभल रहा, तो पंचायतों का भगवान मालिक!
*अरविंद सिंह जादौन ब्यूरो चीफ*
भिंड/भिंड जिले की रौन जनपद पंचायत एक बार फिर गंभीर आरोपों और चर्चाओं के केंद्र में है। इस बार मामला पंचायतों में हुए कथित भ्रष्टाचार का नहीं, बल्कि खुद जनपद पंचायत कार्यालय में चल रहे मरम्मत और निर्माण कार्य का है, जहां ठेकेदार और अधिकारियों की कथित मिलीभगत से सरकारी पैसों की बंदरबांट किए जाने के आरोप लग रहे हैं।
जनपद पंचायत कार्यालय में दीवारों पर लगाई गई टाइल्स अभी 15 दिन पहले ही लगाई गई थीं, लेकिन अब वे दीवारों से उखड़कर नीचे गिरने लगी हैं। टाइल्स की हालत देखकर स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जिस निर्माण कार्य की गुणवत्ता 15 दिन भी नहीं टिक सकी, वह आखिर कितने महीनों या सालों तक टिक पाएगा?
सबसे गंभीर आरोप यह है कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले दीवारों की न तो ठीक से घिसाई की गई और न ही मरम्मत। आरोप है कि सीधे दीवारों पर टाइल्स चिपकाकर सिर्फ लीपापोती की गई, ताकि कागजों में काम दिखाकर भुगतान निकाला जा सके। यही वजह बताई जा रही है कि टाइल्स इतनी जल्दी उखड़ने लगीं।
यह पूरा निर्माण कार्य जनपद पंचायत सीईओ वंदना गंगल के कार्यालय के सामने ही चल रहा है। ऐसे में स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब सीईओ की चौखट पर ही भ्रष्टाचार टपकता दिखाई दे रहा हो, तो क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में किस स्तर पर भ्रष्टाचार बह रहा होगा, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायतों में पहले से ही फर्जी बिल, बिना काम भुगतान, अधूरे निर्माण और कमीशनखोरी के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। शिकायतें हुईं, जनसुनवाई में आवेदन दिए गए, मीडिया ने खबरें भी प्रकाशित कीं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ फाइलों का खेल चलता रहा।
अब जनपद कार्यालय की उखड़ती टाइल्स ने पूरे सिस्टम की पोल खोलकर रख दी है। क्षेत्र में यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि “बहते हुए भ्रष्टाचार में वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी भी डुबकियां लगा रहे हैं।”
जनता अब खुलकर कह रही है कि —
“काम कम, कमीशन ज्यादा” ही जनपद का नया सिस्टम बन चुका है!
ग्रामीण अब पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल और वर्तमान मोहन यादव सरकार की तुलना भी कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि शिवराज सिंह चौहान के समय यदि जनता आवाज उठाती थी या मीडिया में खबर प्रकाशित होती थी, तो तत्काल जांच और ठोस कार्रवाई देखने को मिलती थी।
लेकिन आज हालात ऐसे हैं कि अधिकारियों और कर्मचारियों की चौखट पर ही भ्रष्टाचार दिखाई दे रहा है, फिर भी सुनवाई नहीं हो रही।
अब जनता के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है —
क्या मोहन सरकार में भी भ्रष्टाचार के मामलों में वैसी ही सख्त कार्रवाई देखने को मिलेगी जैसे की पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के समय में देखने को मिलती थी अब देखने वाली बात होगी अगर रौन जनपद पंचायत में चल रहे निर्माण कार्य हो रहा है भ्रष्टाचार को लेकर जो आवाज उठाई गई है उस पर तुरंत एक्शन और ठोस कार्रवाई होती है या नहीं।
यह सवाल जनता ने पूछा है वर्तमान मुख्यमंत्री क्या कर पाएंगे कार्रवाई। या फिर बहा वाही लूटने में लगे रहेंगे
क्या रौन जनपद पंचायत कार्यालय में हुए इस कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच होगी?
क्या घटिया निर्माण और सरकारी धन की बंदरबांट करने वालों पर कार्रवाई होगी?
या फिर यह मामला भी फाइलों में दबाकर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
रौन में अब यह मामला सिर्फ उखड़ती टाइल्स का नहीं, बल्कि पूरे पंचायत सिस्टम की पारदर्शिता, गुणवत्ता और प्रशासनिक जवाबदेही पर खड़े बड़े सवालों का बन चुका है।
