कृषि विज्ञान केंद्र नारायणपुर में कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए “संतुलित उर्वरक उपयोग, बीजीए उत्पादन एवं हरी खाद का महत्व” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों तक टिकाऊ एवं कम लागत वाली कृषि तकनीकों को पहुंचाना, मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखना तथा वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देना रहा।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में केवीके के शस्य विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. हरेंद्र टोंडे ने संतुलित उर्वरक प्रबंधन, बीजीए उत्पादन एवं हरी खाद के उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि खेतों में आवश्यकता अनुसार संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करने से फसल उत्पादन में वृद्धि होती है और मिट्टी की गुणवत्ता लंबे समय तक सुरक्षित बनी रहती है।
डॉ. टोंडे ने धान की खेती में बीजीए एवं हरी खाद की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बीजीए वातावरण से नाइट्रोजन लेकर पौधों को उपलब्ध कराता है, जिससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है और किसानों की खेती लागत घटती है। उन्होंने कहा कि यदि इन तकनीकों को गांव स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए तो किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने कृषि विभाग के मैदानी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से किसानों को सरल भाषा में वैज्ञानिक खेती की जानकारी देने तथा आधुनिक तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित करने की अपील की।
कार्यक्रम में डॉ. अंकिता सिंह, डॉ. अलिया अफरोज, डॉ. ललित कुमार वर्मा एवं इंद्र कैमरो सहित कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
संवाददाता खुमेश यादव
