भूतपूर्व सैनिकों का अनुभव अब समाज निर्माण में आएगा काम
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कलेक्टर ने भूतपूर्व सैनिकों को जनकल्याण अभियानों से जोड़ा
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जिला प्रशासन द्वारा आयोजित #भूतपूर्व_सैनिक_चौपाल में जिले के भूतपूर्व सैनिकों के साथ संवाद स्थापित कर उन्हें जिले के विकास एवं जनकल्याणकारी अभियानों में सक्रिय सहभागिता के लिए आमंत्रित किया गया। कलेक्टर विकास मिश्रा ने कहा कि भूतपूर्व सैनिकों का अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, सेवा भावना और समाज के प्रति समर्पण जिले के विकास कार्यों को नई दिशा दे सकता है। उन्होंने कहा कि सैनिक केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद भी समाज निर्माण में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो सकती है।
चौपाल में कलेक्टर ने भूतपूर्व सैनिकों से स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, रोजगार सृजन, नशामुक्ति एवं सामाजिक जागरूकता अभियानों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया। उन्होंने विशेष रूप से टीबी मुक्त भारत अभियान में सहयोग की अपील करते हुए कहा कि भूतपूर्व सैनिक अपने क्षेत्र के टीबी मरीजों के संपर्क में रहकर यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं कि उनका उपचार नियमित और सही तरीके से हो रहा है। उन्होंने भूतपूर्व सैनिकों से निक्षय मित्र बनकर टीबी उन्मूलन अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप देने की अपील की।
कलेक्टर ने बताया कि आदिवासी बाहुल्य कुसमी क्षेत्र में सिकल सेल एनीमिया की स्क्रीनिंग एवं उपचार की निगरानी अत्यंत आवश्यक है, जिसमें भूतपूर्व सैनिकों का सहयोग उपयोगी सिद्ध हो सकता है। इसी प्रकार गंभीर कुपोषित बच्चों के पोषण स्तर में सुधार, उनके परिवारों से सतत संवाद और पोषण संबंधी व्यवहार परिवर्तन में भी उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी।
शिक्षा के क्षेत्र में कलेक्टर ने भूतपूर्व सैनिकों से आदिवासी छात्रावासों के साथ नियमित संपर्क बनाए रखने तथा छात्र-छात्राओं को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की निगरानी एवं मार्गदर्शन में सहयोग करने का आग्रह किया। साथ ही युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं एवं सैन्य सेवाओं के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि जिले में युवाओं के मार्गदर्शन हेतु सीधी में संकल्प कोचिंग, चुरहट में श्रमोदय कोचिंग संचालित हैं, जबकि सिहावल में कौटिल्य कोचिंग एवं मझौली में अग्निवीर कोचिंग शीघ्र प्रारंभ की जा रही हैं। इन संस्थानों में भूतपूर्व सैनिकों के अनुभव एवं मार्गदर्शन से युवाओं को बड़ा लाभ मिल सकता है।
कलेक्टर ने स्वरोजगार एवं स्थानीय रोजगार सृजन के क्षेत्र में भी भूतपूर्व सैनिकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भूतपूर्व सैनिक अपने अनुभव और नेतृत्व क्षमता के आधार पर स्वरोजगार इकाइयां स्थापित कर स्थानीय युवाओं को रोजगार उपलब्ध करा सकते हैं। इसके साथ ही ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देने तथा सामुदायिक सहभागिता से आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर भी बल दिया गया।
नशामुक्त समाज के निर्माण पर जोर देते हुए कलेक्टर ने कहा कि भूतपूर्व सैनिक समाज में अनुशासन और सकारात्मक जीवनशैली के प्रेरक हैं। ऐसे में वे नशे के विरुद्ध जनजागरूकता अभियान में प्रभावी भूमिका निभाकर युवाओं को सकारात्मक दिशा दे सकते हैं।
चौपाल में उपस्थित भूतपूर्व सैनिकों ने जिला प्रशासन की इस पहल का स्वागत करते हुए इसे समाजहित में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, टीबी उन्मूलन, नशामुक्ति, युवाओं के मार्गदर्शन एवं रोजगार सृजन सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और अभियानों के प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय सहभागिता एवं सहयोग देने की सहमति व्यक्त की।
इस अवसर पर जिला सैनिक कल्याण अधिकारी ग्रुप कैप्टन सिद्धार्थ श्रीवास्तव, वीर नारी, जिला प्रशासन के संबंधित अधिकारी एवं भूतपूर्व सैनिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
संंवाददाता गिरीश शुक्ला की रिपोर्ट
