राज्य सरकार द्वारा राज्यभर में 25 मई से 5 जून तक संचालित “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” के अंतर्गत जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र, एवं जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में जिला उद्योग केंद्र परिसर में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) कार्यशाला एवं विवाद एवं शिकायत निवारण तंत्र (डीआरएम) बैठक का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन, जनसहभागिता आधारित विकास कार्यों को बढ़ावा देना तथा उद्योगों के सहयोग से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को सुनिश्चित करना रहा। कार्यक्रम में विभिन्न औद्योगिक इकाइयों, विभागीय अधिकारियों एवं औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
कार्यशाला में जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग द्वारा मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.2 एवं 2.3 के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों, जलग्रहण विकास, भू-संरक्षण गतिविधियों तथा राज्य मद से स्वीकृत कार्यों में गैप फंडिंग के लिए अधिकाधिक जनसहयोग एवं सीएसआर सहयोग प्राप्त करने संबंधी विस्तृत जानकारी पीपीटी के माध्यम दी।
अतिरिक्त जल संसाधन विभाग द्वारा बताया गया कि जल संरक्षण अभियान के अंतर्गत रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग, वर्षा जल संचयन, रिचार्ज शाफ्ट निर्माण, भूजल पुनर्भरण, जल संरचनाओं का विकास, तालाबों का पुनर्जीवन एवं जलग्रहण आधारित संरचनाओं के माध्यम से जल संरक्षण को प्रभावी बनाया जा सकता है। साथ ही पौधारोपण, हरित क्षेत्र विकास, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, जल स्रोतों की स्वच्छता एवं पर्यावरणीय जागरूकता के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया।
बैठक में औद्योगिक इकाइयों को सरकारी भवनों में वर्षा जल संचयन, विद्यालय परिसरों में वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं, चारागाह विकास, मॉडल तालाब निर्माण, सार्वजनिक स्थलों पर हरित विकास, पौधारोपण जैसे कार्यों में सीएसआर के माध्यम से योगदान हेतु प्रेरित किया गया। कार्यशाला में महाप्रबंधक जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र कमलेश कुमार मीना ने पर्यावरण संरक्षण एवं योजनाओं के बारे में जानकारी दी।
इसके अतिरिक्त “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान” के अंतर्गत सभी औद्योगिक इकाइयों एवं प्रतिनिधियों को प्लेज फॉर्म भरकर जल एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति सामूहिक संकल्प लेने हेतु प्रेरित किया गया।
सभी इकाइयों से आह्वान किया गया कि वे जल की प्रत्येक बूंद के संरक्षण, वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों की स्वच्छता, भूजल पुनर्भरण, पौधारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण संबंधी गतिविधियों को अपने संस्थागत एवं सामाजिक दायित्वों का हिस्सा बनाएं तथा इन कार्यों को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ें।
बैठक में विभिन्न औद्योगिक इकाइयों द्वारा विद्यालयों में वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं के निर्माण, आयुर्वेद चिकित्सालयों एवं सार्वजनिक पार्कों में पौधारोपण, चारागाह विकास एवं पर्यावरण संरक्षण संबंधी अनेक जनहितकारी प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए।
कार्यक्रम में बीएसएल लि0 के प्रतिनिधि आर डी जाट, जिंदल साॅ लि0 के प्रतिनिधि पराग पटेल, आरसीएम ग्रुप के प्रतिनिधि डॉ केशव, डी.एस. भाटी, हिन्दूस्तान जिंक लि. प्रतिनिधि भुवनेश शर्मा, संगम इडिया लि. प्रवक्ता राजकुमार जैन, सुधिवा स्पिनर्स के प्रतिनिधि अर्पित जैन, आरएसडब्ल्युएम लि. प्रतिनिधि वैभव जोशी, जानकी कॉर्पोरेशन मधुसूदन शर्मा, सहित विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में अधीक्षण अभियंता वॉटरशेड से रामराज मीणा ,लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष शंभू प्रसाद काबरा, अधीक्षण अभियंता धनपत राज सोनी, जिला सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी इशांत काबरा, वरिष्ठ उप महाप्रबंधक एस.के. नैनावटी, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक निशांत कुमावत, राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल के कृतिका सोनवत, मेवाड़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के मानद महासचिव आर.के. जैन ,, लघु उद्योग भारती ग्रोथ सेंटर हमीरगढ़ के अध्यक्ष श्री गिरीश अग्रवाल, अजय मुंदडा जिला लघु उद्योग संघ के अध्यक्ष राजकुमार पोखरना तथा जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र के महाप्रबंधक कमलेश कुमार मीना सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
