नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड की 11 वैकल्पिक शालाओं में “स्कूल केइंता अभियान” अंतर्गत कलेक्टर नम्रता जैन के निर्देशानुसार सामुदायिक आनंद मेला एवं समर कैंप का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन का उद्देश्य बच्चों को आनंदमय एवं रचनात्मक शिक्षण वातावरण उपलब्ध कराना, विद्यालय से जोड़ना, उनमें आत्मविश्वास विकसित करना तथा समुदाय एवं अभिभावकों की स्कूलों में सहभागिता बढ़ाना रहा। आनंद मेला के दौरान शिक्षार्थ टीम तोके, घमंडी, नेलांगुर एवं हितावाडा सहित चार गांवों तक पहुंची, जहां ग्रामीणों एवं बच्चों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली। कार्यक्रम में लगभग 800 ग्रामीणों एवं 350 बच्चों ने नियमित रूप से भाग लिया। ग्रामीणों ने प्रत्येक गतिविधि और खेल को उत्सवमय वातावरण में संपन्न कराया।
कार्यक्रम की शुरुआत तोके गांव में ग्राम देवता पूजन के साथ हुई। गांव के मुखिया एवं वरिष्ठ ग्रामीणों की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में मांदर, ढोल एवं पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ नृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी का उत्साह बढ़ाया। वहीं हितावाडा गांव में आयोजित बैठक में लगभग 200 ग्रामीण, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं अतिथि शिक्षक शामिल हुए। बैठक में ग्रामीणों ने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने की सहमति जताई तथा आगामी शिक्षा सत्र में 10 नए बच्चों के नामांकन का प्रस्ताव रखा। ग्रामीणों ने प्रशासन से स्कूल, आंगनवाड़ी, बिजली एवं सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग भी की। आनंद मेला में बच्चों के लिए पेंटिंग, मिट्टी से मूर्ति निर्माण, कहानी लेखन एवं स्टोरी टेलिंग जैसी रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया गया। बच्चों एवं ग्रामीणों ने “बदलता अबूझमाड़” विषय पर चित्र बनाकर अपने गांव, जंगल एवं स्थानीय जीवन को रचनात्मक रूप में प्रस्तुत किया। इसके साथ ही प्रेरणादायक फिल्म प्रदर्शन के माध्यम से शिक्षा के महत्व को समझाया गया।
कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण से संबंधित गतिविधियां भी आयोजित की गईं, जिनमें जंगल भ्रमण, पौधों की पहचान एवं स्वच्छता अभियान शामिल रहे। बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझा। स्थानीय एवं पारंपरिक खेलों जैसे कबड्डी, खो-खो, रस्साकसी, बोरा दौड़, गिल्ली-डंडा, व्हॉलीबॉल आदि प्रतियोगिताओं में बच्चों, महिलाओं एवं पुरुषों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। शाम के समय आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम, नृत्य एवं प्रेरणादायक कहानियों ने पूरे आयोजन को उत्सव जैसा माहौल प्रदान किया। इस आयोजन से बच्चों में विद्यालय एवं सीखने के प्रति रुचि बढ़ी है। साथ ही उनमें आत्मविश्वास एवं समूह में सहभागिता की भावना विकसित हुई है। आनंद मेला के माध्यम से स्थानीय संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण को बढ़ावा मिला तथा समुदाय एवं विद्यालय के बीच सकारात्मक संबंध और विश्वास मजबूत हुआ।
संवाददाता खुमेश यादव
