मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शोभा पटेल द्वारा बताया गया कि ग्रीष्म ऋतु में माह जून तक तापमान में बढ़ोत्तरी परिलक्षित होती है। तापमान की वृद्धि के कारण मानव स्वास्थ्य पर अनेक प्रकार के विपरीत प्रभाव होने की आशंका रहती है, यह मौसम भीषण गर्मी के प्रकोप वाला होने के कारण सेहत के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण माना जाता है, इसको लेकर बरती गई लापरवाही कई तरह की बीमारियों का शिकार बना सकती है। बढ़ता हुआ तापमान कई प्रकार के रोगों के पनपने और बीमारियों को फैलाने के लिए आदर्श होता है। पेट से लेकर आंखें तक यह मौसम सभी के लिए कई तरह से हानिकारक हो सकता है। इसलिए आवश्यक है कि अधिक तापमान होने के कारण होने वाले दुष्प्रभावों की रोकथाम एवं प्रभावी नियंत्रण हेतु समयानुसार उपाय किए जाए, ताकि मानय स्वास्थ्य को होने वाली हानि से यथासंभव बचा जा सके।
*गर्मी के मौसम में बीमारियों से रोकथाम हेतु*
*लू (हीट स्ट्रोक) :-* हीट स्ट्रोक या लू लगने पर शरीर का तापमान 40 डिग्री (104 डिग्री फेरेनहाइट) तक पहुंच जाता है, इस समय सही उपचार न मिलने पर पीड़ित की मृत्यु तक हो सकती है।
*लू के लक्षण :-* सिर में भारीपन व दर्द का अनुभव होना, तेज बुखार के साथ मुंह का सूखना, चक्कर और उल्टी आना, कमजोरी के साथ शरीर में दर्द होना, शरीर का तापमान अधिक होने के बावजूद पसीने का न आना, अधिक प्यास लगना और पेशाब कम आना, भूख कम लगना, बेहोश होना आदि।
*लू से बचाव के उपाय :-* तेज धूप और गर्मी में ज्यादा देर तक रहने के कारण शरीर में पानी और खनिज मुख्यतया नमक की कमी हो जाना होता है, अतः इससे बचाव के लिए निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए। बहुत अनिवार्य न हो तो घर से बाहर नहीं जाए, धूप में निकलने से पहले सर व कानों को कपड़े से अच्छी तरह से बांधे, पानी अधिक मात्रा में पिए, नरम, मुलायम सूती कपड़े पहनें, अधिक पसीना आने की स्थिति में ओआरएस घोल पिए, चक्कर आने, मितली आने पर छायादार स्थान पर आराम करें तथा शीतल पेयजल, तथा फलों का रस, लस्सी और मठा आदि का सेवन करें, उल्टी, सरदर्द, तेज बुखार की दशा में निकट के अस्पताल अथवा स्वास्थ्य केंद्र में जरूरी सलाह लेकर उपचार करवाए, बच्चे, बुजुर्ग एवं बीमार व्यक्त्ति घर से बाहर कम निकलें, विशेषतः दोपहर 12 से 04 बजे के बीच घर से बाहर ना जाएँ, बुखार पीड़ित व्यक्ति के सिर पर ठंडे पानी की पट्टी लगाए, अधिक पानी के साथ पेय पदार्थ पिलायें, जैस कच्चे आम का पना, जलजीरा आदि, पीड़ित व्यक्ति को पंखे के नीचे हवा में लेटा दें, पीडित व्यक्ति को शीघ्र ही किसी नजदीकी चिकित्सक या अस्पताल में इलाज के लिए ले जाए तथा आशा/ए.एन.एम. से ओ.आर.एस. की पैकेट हेतु संपर्क करें।
संवाददाता राकेश भिलाला
