अमरोहा के देहात थाना क्षेत्र के छोटे से गांव रामहट में शुक्रवार का दिन ऐसा बीता, जिसे गांव वाले शायद ही कभी भूल पाएंगे। जिस घर में एक दिन पहले तक शादी के गीत गूंज रहे थे, वहीं अचानक चीख-पुकार और मातम ने जगह ले ली। बेटे की बारात वापसी के कुछ ही घंटों बाद पिता की मौत ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया। उसी दिन गांव में दो अन्य बुजुर्ग महिलाओं के निधन की खबर ने माहौल को और भारी कर दिया।
गांव निवासी 67 वर्षीय महावीर सिंह, जो बिजली विभाग में मुख्य लाइनमैन के पद से सेवानिवृत्त हुए थे, पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रहे थे। नौकरी से रिटायर होने के बाद वे खेती-बाड़ी में समय बिताते थे और गांव में एक शांत स्वभाव के व्यक्ति के रूप में जाने जाते थे। परिवार में सबसे छोटे बेटे रविंद्र कुमार की शादी थी। गुरुवार को बारात संभल गई थी और घर में खुशियों का माहौल था। रिश्तेदार, मेहमान और गांव वाले नई शुरुआत का जश्न मना रहे थे।
लेकिन शुक्रवार को जैसे ही बारात वापस गांव पहुंची, महावीर सिंह की तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिवार के लोग उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने काफी देर तक उपचार किया, लेकिन उनकी सांसें लगातार कमजोर होती चली गईं। शाम करीब तीन बजे डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
जिस घर में दूल्हे के स्वागत की तैयारियां थीं, वहां कुछ ही देर बाद रोने-बिलखने की आवाजें गूंजने लगीं। नई नवेली दुल्हन के घर में कदम रखते ही खुशियों की जगह मातम ने ले ली। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि शायद ही कभी उन्होंने ऐसा मंजर देखा हो, जब शादी की खुशियां इतनी जल्दी शोक में बदल गई हों।
इसी दिन गांव की दो बुजुर्ग महिलाओं — 65 वर्षीय दयावती और 65 वर्षीय चंद्रकला — का भी बीमारी के चलते निधन हो गया। कुछ ही घंटों में तीन मौतों की खबर से पूरा रामहट गांव सन्न रह गया। गांव की गलियों में न ढोल की आवाज सुनाई दी और न ही शादी की रौनक दिखाई दी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि महावीर सिंह अपने परिवार के बेहद जिम्मेदार सदस्य थे और बेटे की शादी को लेकर काफी उत्साहित थे। लेकिन किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था। अब गांव में हर आंख नम है और लोग यही कह रहे हैं — “कल तक जहां शहनाइयां बज रही थीं, आज वहां सन्नाटा है।
रिपोर्ट:-मौ। अज़ीम अमरोहा
