देपालपुर,,
संवाददाता दरबार सिंह ठाकुर तहसील देपालपुर जिला इंदौर मध्य प्रदेश
बेटमा (इंदौर) - तहसील विधिक सेवा समिति देपालपुर के अध्यक्ष एवं जिला न्यायाधीश श्री हिदायत उल्ला खान का बेटमा स्थित गुरुद्वारा साहिब में अल्प प्रवास केवल एक औपचारिक आगमन न होकर उत्कृष्ट न्याय, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक सौहार्द का अद्वितीय संगम बनकर उभरा।
उच्च न्यायिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए भी उनकी सहजता, विनम्रता और करुणा से परिपूर्ण व्यक्तित्व ने उपस्थित जनसमूह के हृदय में गहरी छाप छोड़ी।
गुरुद्वारा परिसर में प्रवेश करते ही प्रबंधक श्री करनेल सिंह, गुरभेज सिंह एवं ज्ञानी जी ने परंपरागत मर्यादाओं के साथ उनका आत्मीय स्वागत किया। श्री खान ने गुरुद्वारा साहिब के दर्शन कर शुभ आशीष प्राप्त किया और लंगर प्रसाद ग्रहण कर सेवा, समानता और समर्पण जैसे सिख पंथ के मूल सिद्धांतों के प्रति अपनी श्रद्धा अभिव्यक्त की। यह क्षण स्वयं में सामाजिक समरसता और धार्मिक सौहार्द का संदेश दे रहा था।
इसी गरिमामय वातावरण के मध्य एक ऐसा मार्मिक दृश्य उभरकर सामने आया, जिसने वहां उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति के अंतर्मन को गहराई तक स्पर्श कर लिया। इंदौर निवासी श्री रविंद्र सिंह, जो पारिवारिक परिस्थितिवश पृथक रहकर बेटमा में निवासरत अपने दोनों नन्हे बच्चों से न्यायालय के आदेशानुसार प्रत्येक माह के प्रथम रविवार को मिलने आते हैं, उसी क्रम में गुरुद्वारा पहुंचे थे। जैसे ही उनकी दृष्टि जिला न्यायाधीश श्री हिदायत उल्ला खान पर पड़ी, वे भावनाओं से अभिभूत होकर अपने दोनों बच्चों के साथ उनके समक्ष उपस्थित हो गए।
इस संवेदनशील क्षण में जिला न्यायाधीश श्री खान ने न केवल एक सच्चे जज की भूमिका निभाई, बल्कि वे एक स्नेहमयी अभिभावक के रूप में भी सामने आए। उन्होंने बच्चों को अपने समीप बुलाकर बड़े ही आत्मीय भाव से ईद की मिठाइयां भेंट कीं और स्नेहिल शब्दों में उन्हें ईद की मुबारकबाद दी। यह दृश्य न्याय की कठोरता के बीच मानवीयता की मधुर धारा के प्रवाह का सजीव प्रतीक बन गया।
इस भावुक क्षण को देख गुरुद्वारा परिसर में उपस्थित सभी श्रद्धालु और गणमान्यजन भाव-विभोर हो उठे। मानो उस पल न्याय और करुणा ने एक-दूसरे का हाथ थाम लिया हो और समाज को यह संदेश दे रहे हों कि सच्चा न्याय वही है, जिसमें इंसानियत की भावना भी समाहित हो।
इस अवसर पर रीडर श्री शैलेंद्र शर्मा, थाना बेटमा के प्रधान आरक्षक श्री जितेंद्र राठौर, आरक्षक श्री विकास सिंह गौतम,आरक्षक श्री उमेश परमार भी उपस्थित रहे, जिनकी उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और अधिक बढ़ाया।
समूचा दृश्य न्यायपालिका की गरिमा, संवेदनशीलता और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बनकर यह संदेश दे गया कि न्याय केवल विधिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों का संवाहक भी है।
