हर्षा रिछारिया ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो अपलोड किया जिसमें उन्होंने कहा कि वह प्रयागराज में चल रहे माघ मेले में मौनी अमावस्या पर पवित्र स्नान करने के बाद अपनी धार्मिक मार्ग को औपचारिक रूप से खत्म कर देंगी. हर्षा ने कहा कि उन्हें लगभग एक साल से लगातार विरोध का सामना किया है. इस पर आपत्ति जताते हुए *उन्होंने कहा, “मैं कोई मां सीता नहीं हूं जो मैं अग्नि परीक्षा दूंगी. एक साल से जितनी परीक्षा देनी थी दे दी. अब बस बहुत हुआ. इस स्नान के बाद मैं अपनी ली हुई प्रतिज्ञा को खत्म कर दूंगी और अपने पुराने प्रोफेशन में लौट जाऊंगी. हर्षा रिछारिया द्वारा ट्वीट करने पर साधु संतों ने भी अपनी अलग-अलग प्रतिक्रिया दी है,श्री कृष्ण जन्मभूमि मंदिर केस के मुख्य याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने कहा है कि संत परंपरा को निभाना बहुत ही कठिन कार्य है, उन्होंने बताया कि हम भी 4 वर्ष से बिना भोजन के रह रहे हैं, हमने संकल्प लिया था कि जब तक मंदिर नहीं आजाद होगा तब तक भोजन नहीं करेंगे और अपने पैरों में जूता चप्पल भी नहीं पहनंगे, कुंज बिहारी पीठाधीश्वर इंदुलेखा और महा मंडलेश्वर रामदास महाराज ने भी हर्षा रिछारिया के बयान की निंदा की।
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