छत्तीसगढ़ पोड़ी उपरोड़ा
नानक राजपूत
स्लग :- राजस्व संबंधित काम काज के लिए पटवारीयों द्वारा ग्रामीणों से कि जा रहि भारी पैसो कि मांग, हालांकि लिखित शिकायत नहीं। वही उच्च अधिकारीयों को भी अवगत नहीं।
राजस्व संबंधी कामकाज के लिए किसी भी तरह के रुपए की मांग नहीं करने के आरोपों को जहां समय-समय पर राजस्व अमले से जुड़े लोग दरकिनार करते रहे हैं वहीं आए दिन इस तरह की शिकायतें भी सामने आती हैं कि विभिन्न काम के संबंध में पोड़ी तहसील क्षेत्र के पटवारियों द्वारा गरीब किसानो से रुपए मांगे जा रहे हैं। हालांकि कि किसी ग्रामीण ने इसकी लिखित शिकायत नहीं कि लेकिन वो दिन दूर नहीं कि पटवारियो द्वारा रुपये मांगे जाने कि शिकायते ग्रामीणों द्वारा न कि जाये।
राजस्व अमला निष्पक्ष तरीके से और बिना कोई मांग किये अपना कार्य अंजाम देते आ रहा है तो जमीनों के नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, चौहड्डी सहित इससे जुड़े अन्य तरह के कार्यों में आम जनता को खासकर ग्रामीण क्षेत्र के किसानों, निजी भूमि स्वामियों को बार-बार चप्पल घिसनी पड़ती है, निजी जमीन का सीमांकन कराने के लिए निम्न से लेकर मध्यमवर्ग तक के लोगों को बार-बार चक्कर पर चक्कर काटना पड़ता है। इसमें कोई संदेह नहीं कि बिना पटवारीयों को चढ़ावा दिए कोई भी काम संभव नहीं, अगर यह बात गलत है तो क्यों बार-बार उनकी दहलीज पर चढ़ना पड़ता है? क्या कभी किसी धनवान अथवा पहुंच वाले व्यक्ति को इस तरह की चक्कर लगाते पाया गया है ? पिसने का काम सिर्फ मध्यम और गरीब वर्ग को ही करना पड़ता है। निस्संदेह व्यवस्था से पीड़ित और सताया हुआ व्यक्ति ही शिकायत की दहलीज पर चढ़ता है।
कुछ किसान गुप्त सूत्रों से बताते हैं कि फौती नामांतरण, नामांकन, सीमांकन, बटांकन, चौहड्डी के नाम पर भारी मात्रा मे गरीब किसानो से राशि ली जा रहि हैँ, किसान शिकायत नहीं करते क्योंकि क्या पता शिकायत के बाद उनका कार्य और लंबित हो जाये और वे संकट मे पड़ जाये, क्युकी सभी को कार्य कराने कि जल्दबाजी होती हैँ चाहे वे कही से कर्ज लेकर ही कार्य क्यों ना कराये, लेकिन यदि सारे कार्य समय सीमा में व्यवस्थाओं के तहत होने लगे तो शिकायत की नौबत ही ना आए। भले ही मुख्यमंत्री व कलेक्टर के द्वारा सभी विभागों मे भ्रस्टाचार खत्म करने कि बात कही जाती हैँ लेकिन जमीनी हकीकत पे गौर करें तो इनके निर्देशो को किस कदर अवहेलना कि जाती हैँ वो ग्रामीण किसान ही बता सकते हैं, उच्च अधिकारीयों के दिए निर्देश हवा में गुम हो जाते हैँ जमीनी स्तर पर किसानो कि इन समस्याओं कि जानकारी तहसीलदार एसडीएम महोदय को भी नहीं होती, इस विषय पर अधिकारीयों भी गंभीरता से सोचना चाहिए।

