संवाददाता – राजअनिल
पोचमपल्लीवार, गडचिरोली
गडचिरोली जिले के धानोरा तहसील के जपतलई स्थित अनुदानित आश्रमशाला में सर्पदंश से तीन छात्राओं की मौत के मामले को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। घटना के बाद आदिवासी विकास विभाग और जिला प्रशासन ने जिम्मेदारी तय करते हुए कड़ी प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
जपतलई की संबंधित अनुदानित आश्रमशाला को बंद करने की सिफारिश शासन से की गई है। वहीं, आश्रमशाला के मुख्याध्यापक और दोनों छात्रावास अधीक्षकों के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा पिछले एक वर्ष के दौरान आश्रमशाला का निरीक्षण करने वाले संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों को भी कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
मुख्याध्यापक और दोनों छात्रावास अधीक्षकों पर मामला
इस मामले में एकात्मिक आदिवासी विकास परियोजना, गडचिरोली के सहायक परियोजना अधिकारी शिक्षा डॉ. प्रभू पुन्या सादमवार की शिकायत पर धानोरा पुलिस थाने में अपराध क्रमांक 86/2026 दर्ज किया गया है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आश्रमशाला के मुख्याध्यापक प्रशांत विलासराव ताटपल्लीवार, महिला छात्रावास अधीक्षिका भाग्यश्री ज्ञानेश्वर चिंल्लमवार और छात्रावास अधीक्षक भास्कर रामचंद्र भोयर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस रिकॉर्ड में घटना 10 अगस्त 2026 की रात लगभग 2 बजे होने का उल्लेख है। छात्राओं की सुरक्षा में लापरवाही बरतने के आरोप में संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। मामले में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की संबंधित धाराओं तथा बाल न्याय अधिनियम की धारा 75 के तहत अपराध दर्ज किया गया है।
निरीक्षण करने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई
प्रशासन ने केवल आश्रमशाला प्रबंधन तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। पिछले एक वर्ष में आश्रमशाला का निरीक्षण करने वाले सभी संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
निरीक्षण केदौरान सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आवश्यक सुविधाओं की स्थिति पर पर्याप्त ध्यान दिया गया था या नहीं, इसकी समीक्षा की जाएगी। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
नागपुर अपर आयुक्तालय की सभी अनुदानित आश्रमशालाओं की अचानक जांच
जपतलई की घटना के बाद नागपुर अपर आयुक्तालय के कार्यक्षेत्र में आने वाली सभी अनुदानित आश्रमशालाओं की अचानक जांच करने का निर्णय लिया गया है।
जांच में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एक परियोजना कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारियों को दूसरे परियोजना कार्यालय के क्षेत्र की आश्रमशालाओं का निरीक्षण कराया जाएगा। इसके लिए अलग और सरल जांच प्रपत्र भी उपलब्ध कराया गया है।
जांच के दौरान विद्यार्थियों की सुरक्षा, छात्रावास व्यवस्था, स्वच्छता, आवश्यक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की वास्तविक स्थिति की जांच की जाएगी।
विद्यार्थियों के लिए कॉट और जरूरी सुविधाओं पर जोर
सभी अनुदानित आश्रमशालाओं में विद्यार्थियों के सुरक्षित निवास को प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किए गए हैं। विद्यार्थियों के लिए कॉट तथा अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश संबंधित संस्थाओं को दिए गए हैं।
थर्ड पार्टी ऑडिट का प्रस्ताव
अनुदानित आश्रमशालाओं की व्यवस्था का निष्पक्ष और स्वतंत्र मूल्यांकन करने के लिए थर्ड पार्टी ऑडिट का प्रस्ताव भी रखा गया है। यह प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन है।
इस ऑडिट के माध्यम से विद्यार्थियों की सुरक्षा, छात्रावास व्यवस्था, बुनियादी सुविधाओं और निर्धारित नियमों के पालन का स्वतंत्र मूल्यांकन किया जाएगा।
जपतलई की दर्दनाक घटना के बाद प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आश्रमशालाओं में विद्यार्थियों की सुरक्षा और सुविधाओं से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच में यदि किसी प्रकार की लापरवाही या खामी सामने आती है, तो संबंधितों की जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

