छत्तीसगढ़ बेमेतरा जिला, तहसील बेरला, भिंभौरी
संवाददाता : विकास कश्यप
किसानों के रोजाना ₹3.28 के अंशदान से तैयार होगा ₹328.8 करोड़ का बजट, मुख्यमंत्री को भेजा गया प्रस्ताव :
बेरला :- छत्तीसगढ़ में आवारा व खुले में घूमने वाले मवेशियों से फसलों को होने वाले नुकसान को रोकने के लिए 'फसल बचाओ योजना' का एक अनूठा मॉडल प्रस्तुत किया गया है। बेमेतरा जिले की भिनभौरी तहसील के ग्राम बोहारडीह निवासी विकास कश्यप ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र भेजकर प्रदेश के हर गांव में पहाँटिया (फसल रखवाले) नियुक्त करने की मांग की है। इस योजना की खासियत यह है कि इसे लागू करने से राज्य सरकार के खजाने पर 1 रुपये का भी वित्तीय भार नहीं आएगा।
योजना के प्रमुख बिंदु और पहाँटिया नियुक्ति का स्वरूप:
40 हजार से अधिक पहाँटिया की नियुक्ति: प्रदेश के 20,126 गांवों में फसलों की सुरक्षा के लिए प्रति गांव कम से कम 2 पहाँटिया के हिसाब से कुल 40,252 पहाँटिया की तत्काल नियुक्ति का प्रस्ताव है।
कार्य अवधि व मानदेय: पहाँटिया की कार्य अवधि 1 जुलाई से 31 मार्च तक केवल 9 महीने की होगी। इसमें ₹9,076 प्रतिमाह के हिसाब से प्रति पहाँटिया को 9 महीने का कुल ₹81,684 मानदेय दिया जाएगा।
योग्यता व वर्ग: निरक्षर अथवा न्यूनतम 5वीं पास युवाओं को पहाँटिया नियुक्त किया जाएगा। इसमें यादव, राउत, ठेठवार और गोंड जाति के पात्र युवाओं को शामिल करने की मांग की गई है।
किसानों के मामूली अंशदान से जुटाया जाएगा बजट:
कुल खर्च: 40,252 पहाँटिया के 9 महीने के मानदेय का कुल खर्च ₹328.79 करोड़ आएगा।
किसानों पर बोझ: प्रदेश के 27.40 लाख किसानों से सहकारी समिति के माध्यम से मात्र ₹1,200 प्रतिवर्ष (यानी रोजाना सिर्फ ₹3.28) लिया जाएगा।
शून्य सरकारी खर्च: इस अंशदान से कुल ₹328.80 करोड़ की राशि एकत्रित होगी, जिससे सरकार पर ₹1 का भी खर्च नहीं आएगा।
नियम और व्यवस्था:
फसल खराब करने वाले मवेशियों को बांधना अनिवार्य होगा और नियम उल्लंघन पर कोटवाल, पटवारी व पुलिस द्वारा कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। 8 से अधिक मवेशी वाले किसानों के लिए गांव में रात्रि गोठान की व्यवस्था होगी। इसके साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले पहाँटिया को शासकीय कार्यक्रमों में सम्मानित भी किया जाएगा।


