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सागौन तस्करों के सामने नतमस्तक वन विभाग! बीच रास्ते काट दिए इमारती पेड़, निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल : NN81

 


 सागौन तस्करों के सामने नतमस्तक वन विभाग! बीच रास्ते काट दिए इमारती पेड़, निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल : 

कबीरधाम वन मंडल एक बार फिर वन संपदा की सुरक्षा को लेकर सवालों के घेरे में है। वन परिक्षेत्र सहसपुर लोहारा अंतर्गत वन चौकी बड़ौदा खुर्द के परिक्षेत्र क्रमांक 305 में इमारती सागौन वृक्षों की खुलेआम कटाई ने वन विभाग की कार्यप्रणाली की पोल खोलकर रख दी है। सबसे गंभीर बात यह है कि तस्करों ने घने जंगल के भीतर नहीं, बल्कि बीच रास्ते में खड़े सागौन के पेड़ों को काट दिया और विभाग को इसकी भनक तक नहीं लगी चौकी से महज 500 मीटर की दूरी में इमरती सागौन पेड़ की बलि चढ़ा दी गई है 

मौके पर कटे हुए सागौन के ठूंठ और लकड़ियां साफ दिखाई दे रही हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अवैध कटाई हाल ही में की गई है। इसके बावजूद वन विभाग की ओर से न तो तत्काल कोई कार्रवाई की गई और न ही किसी तस्कर की गिरफ्तारी की सूचना सामने आई है। इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर वन विभाग की गश्त, चौकसी और निगरानी व्यवस्था किस हद तक प्रभावी है।

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से वन तस्कर सक्रिय हैं और समय-समय पर बहुमूल्य सागौन सहित अन्य इमारती वृक्षों की अवैध कटाई की घटनाएं सामने आती रही हैं। इसके बावजूद विभाग केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित दिखाई देता है। यदि रास्ते के किनारे खड़े पेड़ सुरक्षित नहीं हैं तो जंगल के अंदर की वन संपदा कितनी सुरक्षित होगी, इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

वन विभाग द्वारा वन सुरक्षा के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, चौकियां संचालित की जाती हैं, गश्ती दल तैनात किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत नजर आ रही है। तस्करों के बढ़ते हौसलों ने यह संकेत दे दिया है कि कहीं न कहीं विभागीय निगरानी कमजोर पड़ चुकी है या फिर जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण वन माफिया बेखौफ होकर जंगलों का दोहन कर रहे हैं।

पर्यावरण प्रेमियों और ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले दिनों में क्षेत्र की बहुमूल्य वन संपदा पूरी तरह तस्करों के कब्जे में चली जाएगी।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या वन विभाग केवल कटे हुए ठूंठों की गिनती कर औपचारिकता निभाएगा या फिर अवैध कटाई के पीछे सक्रिय तस्करों और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। फिलहाल परिक्षेत्र क्रमांक 305 में कटे सागौन के पेड़ वन विभाग की निष्क्रियता और वन तस्करों के बढ़ते नेटवर्क की गवाही दे रहे हैं।

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