संवाददाता – ऐश्वर्य सुमित मिश्रा
शिकायत से खुला शिकारा पंचायत का खेल: सरपंच-सचिव से ₹27.16 लाख की वसूली के आदेश:
सिवनी। जनपद पंचायत घंसौर अंतर्गत ग्राम पंचायत शिकारा में विकास कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में जिला पंचायत सिवनी ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है। जिला पंचायत के विहित प्राधिकारी एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा पारित आदेश में तत्कालीन सरपंच अनुसुइया बरकड़े एवं प्रभारी सचिव/ग्राम रोजगार सहायक अजय डहेरिया को उत्तरदायी मानते हुए ₹27,16,935 की शासकीय राशि की वसूली के निर्देश दिए गए हैं।
यह कार्रवाई ग्राम शिकारा निवासी शेख निज़ाम मंसूरी द्वारा की गई शिकायत के बाद हुई। शिकायत में पंचायत के विभिन्न निर्माण कार्यों में वित्तीय अनियमितताओं एवं गुणवत्ता संबंधी गंभीर सवाल उठाए गए थे। शिकायत के आधार पर कराई गई जांच में कई निर्माण कार्य अपूर्ण, अनुपयोगी तथा स्वीकृत मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए।
जांच में उजागर हुईं गंभीर अनियमितताएं
ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन में हीरालाल के घर के पास पुलिया निर्माण, रामचरण के घर के सामने पुलिया निर्माण, बाउंड्रीवाल सहित विभिन्न विकास कार्यों में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। जांच में पाया गया कि कई कार्यों के लिए शासकीय राशि का आहरण तो कर लिया गया, लेकिन कार्य निर्धारित गुणवत्ता एवं स्वरूप में पूर्ण नहीं किए गए। इससे शासकीय धन के दुरुपयोग और निष्फल व्यय की स्थिति बनी।
शिकायतकर्ता की पहल से खुला मामला
शिकायतकर्ता शेख निज़ाम मंसूरी ने पंचायत में कराए गए विकास कार्यों की गुणवत्ता, भुगतान प्रक्रिया एवं निर्माण की वास्तविक स्थिति पर सवाल उठाए थे। शिकायत के बाद संबंधित अभिलेखों की जांच, स्थल निरीक्षण और तकनीकी परीक्षण कराया गया, जिसके आधार पर अनियमितताओं की पुष्टि हुई।
नोटिस, सुनवाई और अंतिम आदेश
मध्यप्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम, 1993 की धारा 89 के तहत प्रकरण दर्ज कर संबंधित पक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। अभिलेखों के अनुसार तत्कालीन सरपंच अनुसुइया बरकड़े निर्धारित तिथियों पर उपस्थित नहीं हुईं, जबकि सचिव अजय डहेरिया ने अपना पक्ष रखा। उपलब्ध अभिलेखों, जांच प्रतिवेदन एवं प्रस्तुत जवाब का परीक्षण करने के बाद सक्षम प्राधिकारी ने दोनों को उत्तरदायी मानते हुए ₹27,16,935 की वसूली के आदेश पारित किए।
हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
प्रभारी सचिव अजय डहेरिया ने कार्रवाई को चुनौती देते हुए मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर में याचिका दायर की थी। न्यायालय ने सक्षम प्राधिकारी के समक्ष जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इसके बाद समस्त अभिलेखों एवं जांच प्रतिवेदन का परीक्षण कर जिला पंचायत ने अंतिम आदेश जारी किया।
अब उठ रहे हैं ये सवाल
यदि निर्माण कार्य अपूर्ण और अनुपयोगी थे, तो उनका भुगतान किस आधार पर किया गया? कार्यों का मापन किस अधिकारी ने किया? गुणवत्ता प्रमाणित करने की जिम्मेदारी किसकी थी? क्या भुगतान से पहले संबंधित अधिकारियों ने स्थल निरीक्षण किया था? ये प्रश्न अब पूरे मामले की जवाबदेही तय करने में अहम माने जा रहे हैं।
अब आगे क्या?
जिला पंचायत के आदेश के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि वसूली की कार्रवाई कितनी शीघ्र पूरी होती है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि क्या मामला केवल वित्तीय वसूली तक सीमित रहेगा या संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय अथवा अन्य वैधानिक कार्रवाई भी की जाएगी।
तथ्य एक नजर में
- ग्राम पंचायत: शिकारा
- जनपद पंचायत: घंसौर, जिला सिवनी
- शिकायतकर्ता: शेख निज़ाम मंसूरी
- तत्कालीन सरपंच: अनुसुइया बरकड़े
- प्रभारी सचिव/ग्राम रोजगार सहायक: अजय डहेरिया
- वसूली की कुल राशि: ₹27,16,935
- कार्रवाई: जिला पंचायत सिवनी द्वारा वसूली के आदेश जारी,
"शिकायत बनी सबूत: शिकारा पंचायत में 27.16 लाख की गड़बड़ी, सरपंच-सचिव पर वसूली की गाज" "जांच में खुली पंचायत की परतें क्यवशिकारा में 27.16 लाख की अनियमितता पर वसूली के आदेश को जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी मान्य करवा पायेंगी?

