सरकारी संवेदनहीनता: बरगी वन डिपो में लकड़ी खत्म, अपनों की अंतिम विदाई के लिए भटक रहे लोग! :
आजादी के 75 साल बाद बरगी वन परिक्षेत्र से एक बेहद असंवेदनशील और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। वन विभाग के डिपो में दाह संस्कार के लिए जलाऊ लकड़ी का स्टॉक पूरी तरह खत्म हो चुका है। सालों से चली आ रही यह व्यवस्था अचानक ठप होने से शोकाकुल परिवारों को अपनों की अंतिम विदाई से पहले लकड़ी की तलाश में मीलों भटकना पड़ रहा है।
मुख्य बिंदु:
सरपंच की चिट्ठी भी बेअसर: ग्राम पंचायत बरगी की सरपंच मंजू चौकसे ने वन विभाग को पत्र लिखकर जल्द लकड़ी उपलब्ध कराने की मांग की थी, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की नींद नहीं टूटी
कागजों तक सीमित योजनाएं:
वन विभाग "स्टॉक खत्म" होने का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ रहा है, जिससे जनता में भारी आक्रोश है।
उग्र आंदोलन की चेतावनी: स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन को चेताया है कि अगर जल्द ही दाह संस्कार के लिए लकड़ी की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
जनता का दर्द: "प्रशासन जीवित लोगों की समस्याएं तो दूर नहीं कर पा रहा, कम से कम मृतकों की अंतिम विदाई को तो सम्मानजनक बना दे। ऐसा लगता है कि अफसरों की संवेदनाएं भी 'आउट ऑफ स्टॉक' हो चुकी हैं।"
अब देखना यह है कि इस गंभीर लापरवाही पर जिला प्रशासन कब जागता है, या फिर किसी और पीड़ित परिवार को शव रखकर लकड़ी के लिए भटकना पड़ेगा।

