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विधानसभा में उठे सिवनी फोरलेन के मुद्दे के बाद भी नहीं जागा प्रशासन—पहली बारिश में डूबा सिवनी का बुधवारी बाजार : NN81

 

 संवाददाता- ऐश्वर्य सुमित मिश्रा

विधानसभा में उठे सवालों के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, पहली बारिश में डूबा बुधवारी बाजार — सिवनी फोरलेन एवं आरओबी निर्माण की गुणवत्ता पर फिर उठे गंभीर प्रश्न : 

सिवनी जिला मुख्यालय में नगझर से खैरीटेक तक लगभग 117 करोड़ रुपये की लागत से मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) के अधिकृत ठेकेदार मे. रायसिंग एंड कंपनी के माध्यम से निर्माणाधीन फोरलेन सड़क एवं रेलवे ओवर ब्रिज (आरओबी) की गुणवत्ता को लेकर पिछले कई महीनों से लगातार सवाल उठ रहे हैं। गुरुवार को सुबह लगभग 7 बजे से दोपहर 2 बजे तक हुई लगातार वर्षा के बाद शहर का प्रमुख व्यापारिक क्षेत्र बुधवारी बाजार पूरी तरह जलमग्न हो गया। पहली ही तेज बारिश में सामने आई इस स्थिति ने निर्माण गुणवत्ता, ड्रेनेज व्यवस्था तथा परियोजना की तकनीकी निगरानी पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

विधानसभा में उठा था मामला

गौरतलब है कि बरघाट विधानसभा के विधायक कमल मर्सकोले ने कुछ माह पूर्व मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में प्रश्न क्रमांक 2056 के माध्यम से सिवनी जिले में निर्माणाधीन फोरलेन एवं आरओबी सहित विभिन्न सड़क परियोजनाओं की गुणवत्ता, तकनीकी अनियमितताओं, अंडुलेशन, केंबर, सड़क की ऊपरी सतह तथा निर्धारित मानकों के पालन को लेकर सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी थी। उन्होंने स्थानीय नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार की जा रही शिकायतों का उल्लेख करते हुए पूछा था कि इन शिकायतों पर शासन द्वारा क्या जांच एवं सुधारात्मक कार्रवाई की गई है।

लोक निर्माण मंत्री द्वारा दिए गए उत्तर में निर्माण गुणवत्ता को लेकर किसी स्पष्ट दंडात्मक कार्रवाई अथवा दोषी अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी की जवाबदेही तय किए जाने का उल्लेख सामने नहीं आया। विधानसभा में मामला उठने के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दिया।


मुख्यमंत्री के दौरे से पहले की गई थी निरीक्षण की अपील

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के 1 जुलाई 2026 को सिवनी आगमन से पूर्व इस निर्माणाधीन परियोजना का औचक निरीक्षण कराने की सार्वजनिक अपील भी हमारे अख़बार द्वारा की गई थी। अपील में आग्रह किया गया था कि मुख्यमंत्री स्वयं निर्माण स्थल का औचक निरीक्षण कर स्वीकृत ड्राइंग-डिजाइन, डीड ऑफ एग्रीमेंट, निर्माण गुणवत्ता तथा तकनीकी मानकों का परीक्षण कराएं। साथ ही जिला कलेक्टर से भी अपेक्षा व्यक्त की गई थी कि वे निर्माणाधीन फोरलेन एवं आरओबी कार्य का स्थल निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों से अनुबंध, तकनीकी मानकों एवं कार्य प्रगति की जानकारी लेकर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें। किंतु ऐसी कोई कार्रवाई सामने नहीं आई।

पहली बारिश में खुली व्यवस्थाओं की पोल

मुख्यमंत्री के दौरे के अगले ही दिन गुरुवार को हुई लगातार वर्षा के दौरान बुधवारी बाजार, शंकर मढ़िया क्षेत्र सहित आसपास के हिस्सों में भारी जलभराव की स्थिति निर्मित हो गई। स्थानीय व्यापारियों एवं नागरिकों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान स्वीकृत ड्राइंग-डिजाइन के अनुरूप समुचित ड्रेनेज व्यवस्था विकसित नहीं की गई तथा कार्य को वैज्ञानिक एवं चरणबद्ध तरीके से पूरा नहीं किया गया, जिसके कारण वर्षा का पानी बाजार क्षेत्र में भर गया और आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

पुराने संसाधन हटाने पर भी उठ रहे सवाल

स्थानीय स्तर पर यह मांग भी लगातार उठती रही है कि नगर में पहले से स्थापित एवं सुचारु रूप से कार्यरत स्ट्रीट पोल एवं अन्य अधोसंरचना को हटाने के बजाय उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जाए तथा बचाई जाने वाली राशि का उपयोग बुधवारी बाजार सहित अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में नालों, पुलिया एवं स्थायी जल निकासी व्यवस्था विकसित करने में किया जाए। किंतु बुधवारी बाजार के ड्रेनेज व्यवस्था को ही स्थान नहीँ दिया गया।

गुणवत्ता और समयसीमा पर उठे प्रश्न

नागरिकों का कहना है कि यदि परियोजना का निर्माण अनुबंध, स्वीकृत ड्राइंग-डिजाइन, भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों तथा एमओआरटीएच के तकनीकी विनिर्देशों के अनुरूप समयबद्ध तरीके से किया जाता, तो पहली ही बारिश में शहर के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक क्षेत्र को इस प्रकार जलमग्न होने की नौबत नहीं आती। इससे परियोजना की गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था तथा निर्माण कार्यों की निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग

स्थानीय नागरिकों, व्यापारिक संगठनों एवं सामाजिक संस्थाओं ने मांग की है कि संपूर्ण फोरलेन एवं आरओबी परियोजना का किसी स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाए। साथ ही निर्माण गुणवत्ता, जलभराव के कारणों, ड्रेनेज व्यवस्था एवं अनुबंध की शर्तों के पालन की निष्पक्ष आर्थिक अपराध शाखा (EOW) से जांच कराई जाए। यदि जांच में निर्माण एजेंसी, संबंधित अधिकारियों अथवा अन्य जिम्मेदार पक्षों की लापरवाही या मानकों का उल्लंघन सामने आता है तो उनके विरुद्ध नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई, वित्तीय उत्तरदायित्व निर्धारण एवं आवश्यक होने पर ब्लैकलिस्टिंग जैसी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जनता को कार्रवाई का इंतजार

विधानसभा में मामला उठने, लगातार जनशिकायतें होने, मुख्यमंत्री के दौरे से पूर्व निरीक्षण की अपील किए जाने तथा पहली ही बारिश में बुधवारी बाजार के जलमग्न होने के बाद अब सिवनी जिले की जनता की निगाहें शासन, जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों पर टिकी हैं। नागरिकों की अपेक्षा है कि करोड़ों रुपये की इस महत्वपूर्ण परियोजना में गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता न हो तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि भविष्य में शहर को ऐसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।

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