रिपोर्टर-मदनलाल बर्मन
100-200 गांव संभाल रहे आत्मा कर्मचारी, सारथी ऐप की बाध्यता से महिला स्टाफ बेहाल ; कृषि तकनीकी संविदा कर्मचारी संघ ने C M को लिखा पत्र, उपस्थिति से छूट की मांग :
उमरिया -- मध्यप्रदेश शासन ने वर्ष 2026 को "किसान कल्याण वर्ष" घोषित किया है, लेकिन धरातल पर योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने वाले आत्मा परियोजना के कर्मचारी ही परेशान हैं।
कृषि तकनीकी संविदा कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर उमरिया को ज्ञापन सौंपकर "सारथी ऐप" पर उपस्थिति दर्ज कराने की बाध्यता से मुक्त करने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
संघ के जिला अध्यक्ष आर. दीपक पटेल ने पत्र में लिखा कि आत्मा परियोजना के ATMA/BTM कर्मचारी ही कृषि विभाग की अंतिम कड़ी हैं। यही कर्मचारी प्राकृतिक खेती, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजनाओं को प्रत्येक कृषक तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं।
लेकिन विभाग द्वारा सभी जिलों में कर्मचारियों को सारथी ऐप पर उपस्थिति दर्ज करने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जिससे फील्ड में काम कर रहे कर्मचारियों को भारी दिक्कत हो रही है।
5 बड़ी समस्याएं गिनाईं
पत्र में संघ ने निम्न समस्याएं बताईं:
कार्य का बोझ: अधिकांश महिला कर्मचारी हैं। 1 कर्मचारी को 100 से 200 गांव देखना पड़ रहे हैं। साथ में सोयाबीन भंडारण, धान खरीदी, बाढ़ वितरण, SIR सर्वे जैसे अन्य विभागों का काम भी दिया जा रहा है।
समय की पाबंदी नहीं: फील्ड का काम किसानों की उपलब्धता पर निर्भर है। कभी-कभी रात तक गांव में रुकना पड़ता है। महिला कर्मचारियों के लिए देर रात घर लौटना संभव नहीं।
ऐप की तकनीकी दिक्कत: फील्ड में सूर्यास्त 5:30 PM तक हो जाता है, जबकि कर्मचारी सुबह 8:00 AM से शाम 5:00 PM तक फील्ड में रहते हैं। इससे चेक इन/चेक आउट में समस्या आती है।
परिवहन की दिक्कत: कई महिला कर्मचारी वाहन नहीं चलातीं। उन्हें पब्लिक ट्रांसपोर्ट से दूरदराज गांव जाना पड़ता है। समय से वापसी नहीं होने पर उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती।
बुनियादी सुविधा का अभाव: फील्ड में मुख्यालय के अलावा बैठने या शौचालय जैसी कोई शासकीय व्यवस्था नहीं है।
संघ की मांग
संघ ने मुख्यमंत्री से विनम्र निवेदन किया है कि उक्त वास्तविक समस्याओं को देखते हुए कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के कर्मचारियों को सारथी ऐप पर उपस्थिति दर्ज कराने की बाध्यता से मुक्त रखा जाए, ताकि वे बिना दबाव के किसानों की सेवा कर सकें।
संघ का कहना: "हम किसान हित में 24 घंटे काम करने को तैयार हैं, लेकिन फील्ड की हकीकत को समझते हुए नियमों में लचीलापन जरूरी है।"

