केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विकासखंड परिसर में आयोजित जन कल्याण शिविर एवं स्वास्थ्य मेला अपेक्षित भीड़ जुटाने में पूरी तरह विफल साबित हुआ। सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रामीणों की मौजूदगी नगण्य रही। हालत यह रही कि पूरे परिसर में कुर्सियां खाली पड़ी रहीं और अधिकांश स्टॉल लाभार्थियों के इंतजार में सूने नजर आए।
शिविर में स्वास्थ्य विभाग, वन विभाग, समाज कल्याण विभाग, शिक्षा विभाग तथा मुख्यमंत्री व्यापारी दुर्घटना बीमा योजना सहित विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाए गए थे। इन स्टॉलों पर लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी देने और समस्याओं के समाधान की व्यवस्था की गई थी, लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में ग्रामीणों की भागीदारी नहीं हो सकी। कार्यक्रम सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक निर्धारित था, लेकिन कई विभागों के अधिकारी और कर्मचारी समय पर नहीं पहुंचे। कुछ कर्मचारी 11 बजे के बाद तो कुछ दोपहर 12 बजे के आसपास कार्यक्रम स्थल पहुंचे। वहीं कई कर्मचारी मोबाइल फोन चलाते, आपस में बातचीत करते और फोटो-सेल्फी लेते दिखाई दिए। कुछ स्थानों पर कर्मचारी टेबल-कुर्सियों पर आराम करते भी नजर आए। शिविर की सूचना गांवों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंचाई गई, जिसके कारण अधिकांश ग्रामीणों को कार्यक्रम की जानकारी ही नहीं मिल सकी। परिणामस्वरूप सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए आयोजित यह शिविर स्वयं प्रचार के अभाव का शिकार बन गया। इतना ही नहीं, निर्धारित समय से पहले ही कई विभागों ने अपने स्टॉल समेटने शुरू कर दिए और दोपहर 2 बजे से पूर्व ही कार्यक्रम लगभग समाप्त हो गया। शिविर की अव्यवस्थाओं और जनसहभागिता के अभाव ने कार्यक्रम की तैयारियों और प्रशासनिक दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाता तो अधिक संख्या में ग्रामीण योजनाओं की जानकारी और लाभ प्राप्त कर सकते थे।
दिलीप राजपूत
जिला संवाददाता हमीरपुर
