उधवा, 04 जून 2026: विश्व पर्यावरण सप्ताह के अवसर पर उधवा झील पक्षी आश्रयणी में प्रकृति संरक्षण को समर्पित विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता अभियान, पौधारोपण तथा स्थानीय समुदाय के साथ जागरूकता संवाद के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और पक्षी संरक्षण का संदेश दिया गया।
सुबह से ही वनकर्मी एवं सहयोगी झील क्षेत्र की सफाई में जुटे रहे। झील के किनारों एवं आसपास के क्षेत्रों से प्लास्टिक एवं अन्य अपशिष्ट सामग्री हटाकर स्वच्छ एवं स्वस्थ पर्यावरण की दिशा में सामूहिक प्रयास किया गया। इसके साथ ही आश्रयणी परिसर एवं आसपास के उपयुक्त स्थलों पर पौधारोपण कर हरित आवरण बढ़ाने की पहल की गई।
कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा स्थानीय ग्रामीणों एवं आगंतुकों के साथ संवाद रहा। लोगों को आर्द्रभूमियों के महत्व, स्वच्छ परिवेश की आवश्यकता तथा पक्षियों के संरक्षण में समुदाय की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई। उपस्थित लोगों से आग्रह किया गया कि वे झील क्षेत्र में कचरा न फैलाएं और इस महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर की स्वच्छता एवं सुरक्षा बनाए रखने में सहयोग करें।
वनकर्मियों ने बताया कि उधवा झील पक्षी आश्रयणी केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वी भारत की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों में से एक है, जहां प्रत्येक वर्ष बड़ी संख्या में प्रवासी एवं स्थानीय पक्षी आश्रय प्राप्त करते हैं। ऐसे संवेदनशील आवासों का संरक्षण जैव विविधता संरक्षण की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है।
वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है। प्राकृतिक संसाधनों, वन्यजीवों और पक्षी आवासों की सुरक्षा के लिए जनसहभागिता सबसे महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने लोगों से प्रकृति के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने तथा संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर प्रधान वनरक्षी श्री अखिलेश मरांडी, जलज समन्वयक श्री वरुण कुमार तथा उधवा झील पक्षी आश्रयणी के वनकर्मी उपस्थित रहे।
आकाश कुमार भगत
