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डिजिटल राहत बनी आफत! खाद के लिए 'ई-टोकन' की कतारों में पसीना बहा रहा अन्नदाता..............NN81



 (सरकार) द्वारा किसानों की सुविधा और खाद वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए शुरू की गई **'ई-टोकन प्रणाली'** फिलहाल जमीनी स्तर पर दावों के उलट साबित हो रही है। इस नई व्यवस्था ने किसानों की सहूलियत बढ़ाने के बजाय उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। खरीफ/रबी सीजन की शुरुआत होते ही खाद (यूरिया और डीएपी) की किल्लत और टोकन जनरेट करने में आ रही तकनीकी दिक्कतों के कारण किसान भीषण गर्मी में सुबह से ही लंबी-लंबी लाइनों में खड़े होने को मजबूर हैं।

 'सर्वर डाउन' और तकनीकी खामियों से बढ़ा गुस्सा

प्रशासन का दावा था कि ई-टोकन व्यवस्था से किसानों को घर बैठे या नजदीकी कियोस्क से टोकन मिल जाएगा और उन्हें लाइनों से मुक्ति मिलेगी। लेकिन हकीकत यह है कि:

 पोर्टल और सर्वर की समस्या:** एग्री स्टैक और ई-विकास जैसे पोर्टलों पर भारी लोड के कारण सर्वर अक्सर डाउन रहता है।

 *ओटीपी (OTP) का न आना:** मोबाइल पर समय से ओटीपी न आने के कारण घंटों इंतजार करना पड़ता है।

 *सीमित स्लॉट:एक दिन में बेहद सीमित संख्या में टोकन बुक होने के कारण हजारों किसान बिना टोकन के ही केंद्र से खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं।

 बुजुर्ग और शारीरिक रूप से अक्षम किसानों की बढ़ी परेशानी

इस डिजिटल व्यवस्था में सबसे ज्यादा मार बुजुर्ग, महिला और उन किसानों पर पड़ रही है जो तकनीक से पूरी तरह वाकिफ नहीं हैं। संयुक्त खाताधारकों और मृत किसानों के नामांतरण की फाइलों में उलझे परिवारों को आधार वेरिफिकेशन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई केंद्रों पर तो पुलिस बल की निगरानी में खाद का वितरण करना पड़ रहा है, जो स्थिति की गंभीरता को बयां करता है।

> **" मोबाइल पर टोकन बुक ही नहीं होता, और जब यहां आते हैं तो कहा जाता है कि ऑनलाइन स्लॉट फुल हो गया है। खाद समय पर नहीं मिली तो हमारी फसल बर्बाद हो जाएगी।"

 प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

हालाँकि प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था से खाद की कालाबाजारी और बिचौलियों पर लगाम लगेगी, लेकिन जमीनी हकीकत को देखते हुए संयुक्त किसान मोर्चा और स्थानीय किसान संगठनों ने इस प्रणाली में तुरंत सुधार करने या वैकल्पिक व्यवस्था लागू करने की मांग की है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि टोकन सिस्टम को सरल नहीं किया गया और मांग के अनुरूप पर्याप्त खाद नहीं मिली, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

**हमारा नजरिया:** तकनीक का उद्देश्य जनता के काम को आसान बनाना होना चाहिए, न कि उनके लिए नई मुसीबत खड़ी करना। सरकार को चाहिए कि इस ई-टोकन व्यवस्था के साथ-साथ ऑफलाइन या सीधे वितरण की एक सरल वैकल्पिक व्यवस्था भी चालू रखे, ताकि देश का अन्नदाता लाइनों में खड़े होने के बजाय अपने खेतों में काम कर सके। 

 ख्वाजा हुसैन मेवाती की रिपोर्ट

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