फरिवादी बनाने, मामले की जांच एनआईए, एसआईटी से करवाने एवं सुरक्षा की मांग की- पीडित ने कोटा रोड निजी रेस्टोरेंट में प्रेस वार्ता की :
बारां, 29 जून। अटरू रोड पटाखा गोदाम के पास रहने वाले भानुप्रताप सिंह पुत्र अर्जुन सिंह ने कोटा रोड एक निजी रेस्टोरेंट पर प्रेस वार्ता कर मामले में फरिवादी बनाने, उक्त मामले की जांच एसआईटी एवं सुरक्षा की मांग की। साथ ही पीडित ने चेतावनी दी है कि वह जयपुर मुख्यमंत्री आवास के बाहर न्याय की मांग करेंगे। फिर भी न्याय नहीं मिला तो वह मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्मदाह करेगा।
पीडित भानुप्रताप सिंह ने प्रेस वार्ता में बताया कि 20 फरवरी 2026 को आरडी बद्रर्स अटरू रोड के विरूद्ध क्षमता से अधिक ज्वलनशील विस्फोट सामग्री बारूद का भंडारण तथा अवैध पटाखा निर्माण से होने वाली जनहानि को बचाने के लिए विरोध प्रदर्शन कर धारा 288 बीएनएस व 5, 9बी विस्फोटक अधिनियम की प्रथम सूचना रिपोर्ट संख्या 113/2026 पुलिस थाना कोतवाली में प्रकरण दर्ज किया गया था। उक्त गोदामों में नगर परिषद आयुक्त, नगर परिषद टीम व अन्य सहायक टीमों ने आरडी ब्रदर्स के अटरू बारां मैन रोड पर स्थित तीन गोदामों व इनके अलावा ग्राम फूंसरा में स्थित एक गोदाम में विस्फोटक प्रदार्थ सामग्री के अवैध भंडारण होने की जब्ती की कार्रवाई की गई थीं, जिसमें भारी मात्रा में नीले रंग के सूतली पटाखे सुखने के लिए रखे हुए थे, जिनको जब्त कर 1350 सफेट कटटे, नीले, लाल व बिना रंग के सूतली बम पटाखों से भरे मिले।
पीडित भानुप्रताप सिंह ने बताया कि आरडी ब्रदर्स के तीन गोदाम मैन बारां अटरू रोड पर स्थित है, जिनमें एक मेगजीन आतिशबाजी का लाइसेंस व दो दुकानों अनुमानित माप 10 गुणा 15 के लाइसेंस है, लेकिन अभियुक्तगण द्वारा उक्त लाइसेंस की आड में 1 बीघा भूमि दो मजिला इमारत बनाकर गोदाम बना रखा है। पीडित के घर के सामने बारां अटरू रोड पर बारदाने के गोदाम के रूप में गोदाम बनाया हुआ है। जिसमें अवैध पटाखों का भंडारण किया हुआ है। पीडित ने कहा कि उक्त प्रकरण की कार्यवाही के दौरान प्रशासन व जांच अधिकारी द्वारा अभियुक्तगण से मिलीभगत कर मंडोला गोदाम/लाइसेंस के प्रो. को पुलिस गिरफ्त से दूर रखा, अभियुक्तगण के विरूद्ध उक्त प्रकरण दर्ज करवाने में प्रार्थी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है किंतु उसके बावजूद भी पुलिस थाना कोतवाली द्वारा उक्त प्रकरण में पीडित को फरियादी नहीं बनाकर प्रशासनिक स्तर पर प्रकरण दर्ज किया, ताकि अभियुक्तगण को बाद में राहत मिल सके। अनुसंधान अधिकारी व जिम्मेदार अधिकारियों ने गुपचुप रूप से बिना जांच के ग्राम फूंसरा में स्थित गोदाम की सीज खोल दी गई। साथ ही आरोपियों के स्वयं के बचाव करने का अवसर दे फरारी कटवाई। न्यायपालिका द्वारा दो अभियुक्तगण दिनेश खंडेलवाल व रमेश खंडेलवाल को अनुसंधान में सहयोग करने के लिए गिरफ्तरी से राहत दी थी। इसके बाद अनुसंधान अधिकारी द्वारा बुलाने पर वे थाने नहीं पहुंचे और उनके द्वारा किसी प्रकार का कोई सहयोग नहीं किया गया और स्टाॅक रजिस्टर और इतनी बडी मात्रा में आतिशबाजी तैयार करने के लिए ज्वलनशील घातक बारूद और विीिान्न तरह के रसायन विस्फोट सामग्री कहा से किस तरह लाई गई आदि सवालों की विस्तृत जानकारीी नहीं दी जा रही है, इससे अनुसंधान आगे नहीं बढ पा रहा है। नगर परिषद आयुक्त भुवनेश मीणा को मोहरा बनाकर उक्त प्रकरण को रफादफा करने की प्लानिंग की जा रही है। मामले की जांच एनआईए, एसआईटी, जीएसटी, आयकर विभाग व विस्फोटक विभाग द्वारा की जानी चाहिए थी, किंतु स्थानीय पुलिस निरीक्षक (जांच अधिकारी), पुलिस अधीक्षक बारां द्वारा उक्त मामले को अपने स्तर तक ही सीमित रखा। बारूद माफिया खंडेलवाल ब्रदर्स द्वारा बीते कई वर्षों से आयकर विभाग/जीएसटी को गुमराह किया जा रहा है कि उक्त फर्म का वार्षिक टर्नओवर 2-3 करोड रूपए के लगभग है, जबकि पुलिस द्वारा खुलासे में उक्त गोदामों से 40 करोड रूपए का बारूद व विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है।
पीडित ने बताया कि विश्वसनीय सूत्रांे से जानकारी मिली है कि हरदा में हुई विस्फोटक घटना में खंडेलवाल ब्रदर्स बारां की भी सांझेदारी थी। उक्त घटना के बाद वहां पर हुई सख्ती के चलते खंडेलवाल ब्रदर्स ने बारां में अपने गोदामों पर अवैध पटाखे बनाने का व्यापार शुरू किया। अभियुक्तगण द्वारा जो अवैध ज्वलनशील बारूद सामग्री इतनी अत्यधिक मात्रा में मंगवाई जा रही है, वो कहां से आ रही है। इसके बारे में भी पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
पीडित ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि उक्त प्रकरण से प्रार्थी व उसके परिवार को माफियाओं द्वारा दी जा रही धमकियों के कारण प्रार्थी व उसका परिवार हताश है। पीडित भानुप्रताप सिंह ने उक्त मामले में फरियादी बनाने, उक्त मामले की जांच एनआईए, एसआईटी से करवाने एवं स्वयं व परिवार की सुरक्षा की मांग की। साथ ही पीडित ने कहा कि वह जयपुर जाकर मुख्यमंत्री आवास के बाहर न्याय की मांग करेंगे। फिर भी न्याय नहीं मिला तो वह मुख्यमंत्री आवास के बाहर आत्मदाह करेगा।

