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महिला राजमिस्त्री बनकर गढ़ रहीं अपने सपनों का भविष्य........................NN81


*- मजबूत घरों के साथ मजबूत होगा महिलाओं का आत्मविश्वास*


कलेक्टर  अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में ग्रामीण महिलाओं को कौशल आधारित प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने और प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण आवास निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में ग्राम बठेना, जनपद पंचायत पाटन में एक प्रेरणादायक पहल की जा रही है। बैंक ऑफ बड़ौदा ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी), दुर्ग द्वारा संचालित 30 दिवसीय रूरल मेसन (राजमिस्त्री) प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसरों के द्वार खोल रहा है।

ग्राम बठेना में आयोजित इस प्रशिक्षण में 35 महिलाएं भाग ले रही हैं। यह प्रशिक्षण केवल भवन निर्माण की तकनीक सिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और आर्थिक सशक्तिकरण की नई राह भी दिखा रहा है। जो महिलाएं कभी निर्माण कार्य को पुरुषों का क्षेत्र मानती थीं, वे आज राजमिस्त्री बनने का प्रशिक्षण लेकर अपने सपनों को नई उड़ान दे रही हैं।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को नींव निर्माण, दीवार निर्माण की वैज्ञानिक तकनीक, छत ढलाई, प्लास्टर, फ्लोरिंग, फिनिशिंग तथा निर्माण सामग्री के सही अनुपात और उपयोग की विस्तृत जानकारी दी जा रही है। आधुनिक निर्माण तकनीकों के साथ सुरक्षा मानकों और गुणवत्ता नियंत्रण पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। इससे न केवल बेहतर निर्माण कार्य सुनिश्चित होगा, बल्कि सामग्री की अनावश्यक बर्बादी को भी रोका जा सकेगा।

इस प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर सुश्री अनिता चारभे प्रतिभागियों को तकनीकी एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान कर रही हैं। प्रशिक्षणार्थियों को निःशुल्क ड्रेस, टूल किट एवं भोजन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।

मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत दुर्ग  बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण एवं टिकाऊ आवास निर्माण सुनिश्चित करने में प्रशिक्षित राजमिस्त्रियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का कार्य भी कर रहे हैं। कौशल विकास के माध्यम से महिलाएं आत्मनिर्भर बनेंगी और स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए अवसर प्राप्त कर सकेंगी। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन का एक प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है। एक ओर जहां प्रशिक्षित महिला राजमिस्त्री प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले घरों को अधिक मजबूत, सुरक्षित और टिकाऊ बनाने में योगदान देंगी, वहीं दूसरी ओर उनके आत्मविश्वास और सामाजिक भागीदारी में भी वृद्धि होगी। आज ये महिलाएं केवल राजमिस्त्री का प्रशिक्षण नहीं ले रहीं, बल्कि अपने भविष्य की मजबूत नींव भी रख रही हैं।

अनिल जोशी

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