अमरोहा में शुक्रवार की रात एक ऐसा नज़ारा देखने को मिला, जो आमतौर पर दिन के उजाले में दिखाई देता है। घड़ी में करीब 12 बज रहे थे, लेकिन जिले के सबसे बड़े प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी सड़कों पर मौजूद थे। वजह थी अवैध खनन की शिकायतें।
जिला मजिस्ट्रेट डॉ. नितिन गौड़ और पुलिस अधीक्षक लखन सिंह यादव ने थाना अमरोहा क्षेत्र की मुनव्वरपुर चौकी के आसपास खनन सामग्री ढोने वाले वाहनों की अचानक चेकिंग शुरू कर दी। रात की खामोशी के बीच चल रहे इस अभियान ने इलाके में हलचल पैदा कर दी।
अधिकारियों ने एक-एक वाहन को रोककर उसके कागजात, परमिट और खनन सामग्री के परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। कई वाहन चालकों से पूछताछ भी की गई। प्रशासन का मकसद साफ था—यह पता लगाना कि कहीं खनन और उसके परिवहन में नियमों की अनदेखी तो नहीं हो रही।
दरअसल, अमरोहा समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अवैध खनन लंबे समय से प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। नदियों और अन्य क्षेत्रों से अवैध तरीके से खनिज निकालने की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे में जब शिकायतें बढ़ीं तो जिले के दोनों शीर्ष अधिकारियों ने खुद मैदान में उतरकर स्थिति का जायजा लेने का फैसला किया।
आधी रात की इस कार्रवाई का एक बड़ा संदेश भी था। आमतौर पर अवैध गतिविधियां रात के अंधेरे में होने की आशंका रहती है। ऐसे में डीएम और एसपी का खुद मौके पर पहुंचना यह दिखाता है कि प्रशासन शिकायतों को केवल फाइलों तक सीमित नहीं रखना चाहता।
हालांकि जांच के दौरान किसी बड़ी बरामदगी या कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई, लेकिन अधिकारियों ने संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि खनन गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाए। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कुल मिलाकर, अमरोहा में आधी रात को चली यह चेकिंग सिर्फ वाहनों की जांच भर नहीं थी। यह उन लोगों के लिए भी एक संदेश थी जो यह मानकर चलते हैं कि रात के अंधेरे में नियमों को आसानी से दरकिनार किया जा सकता है। इस बार अंधेरे में भी प्रशासन की नजर मौजूद थी।
रिपोर्ट मौ:-मौ। अज़ीम अमरोहा
बाईट डीएम डॉ नितिन गोड़ अमरोहा
