नारायणपुर - छत्तीसगढ़ के दुर्गम और संवेदनशील अबूझमाड़ क्षेत्र में 38वीं वाहिनी आईटीबीपी ने स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से लगभग 60 मीटर लंबा लकड़ी और बाँस से निर्मित पुल तैयार किया है। यह पुल ओरछा थाना से करीब 20 किलोमीटर दूर कुड़मेल गांव के पास बनाया गया है, जहां बरसात के दौरान नाले में तेज बहाव के कारण आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता था। इस समस्या के कारण ग्रामीणों का महीनों तक बाहरी दुनिया से संपर्क खत्म हो जाता था तथा सुरक्षा बलों की परिचालन गतिविधियां भी प्रभावित होती थीं। राशन, स्वास्थ्य सेवाएं और अन्य आवश्यक सुविधाएं पहुंचाना बेहद कठिन हो जाता था। आगामी बरसात के मौसम की गंभीर प्रतिकूलताओं को ध्यान में रखते हुए त्वरित स्तर पर पक्का पुल बनना संभव प्रतीत नहीं हो रहा था। ऐसी परिस्थितियों में 38वीं वाहिनी आईटीबीपी ने अनूठी पहल लेकर इस चुनौतीपूर्ण कार्य को पूरा करने का निर्णय लिया, जिसमें स्थानीय ग्रामीणों ने भी भरपूर सहयोग किया ।
38वीं वाहिनी के कमांडेंट श्री रोशन सिंह असवाल के मार्गदर्शन तथा असिस्टेंट कमांडेंट श्री राम कुमार मौर्य के नेतृत्व में 15 जवानों की टीम ने कठिन परिस्थितियों में यह कार्य केवल 15 दिनों में पूरा किया।
स्थानीय संसाधनों के माध्यम से निर्मित यह पुल न केवल पैदल आवागमन हेतु उपयोगी है, बल्कि चलती हुई मोटरसाइकिल के भार को सुरक्षित रूप से वहन करने में भी सक्षम है।
इस पुल का उद्घाटन श्री रोशन सिंह असवाल कमांडेंट, 38वीं वाहिनी एवं श्री रोबिंसन गुरिया पुलिस अधीक्षक नारायणपुर, श्री वेंकटेश एम जी डीएफओ नारायणपुर द्वारा स्थानीय ग्रामीणों एवं बल के जवानों की उपस्थिति में किया गया।
इस पुल के निर्माण से अब ग्रामीणों और सुरक्षा बलों को वर्षभर सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिलेगी। यह पहल आईटीबीपी की कर्तव्यनिष्ठा, जनसेवा और स्थानीय सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है।
संवाददाता खुमेश यादव
