पाटन। तहसील साहू संघ से जुड़ा पंचायत सचिव मामला अब सामाजिक दायरे से निकलकर सियासी रंग लेने लगा है। इस पूरे घटनाक्रम ने समाज के भीतर बहस और मतभेद को तेज कर दिया है। इसी बीच पूर्व तहसील अध्यक्ष दिनेश साहू ने खुलकर सामने आते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं कि कुछ लोग जानबूझकर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं, जिससे समाज में भ्रम और तनाव की स्थिति उत्पन्न हो रही है।
दिनेश साहू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ग्राम पंचायत सचिव महेंद्र साहू से जुड़ा यह मामला किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत दुश्मनी या चुनावी रंजिश का परिणाम नहीं है। उन्होंने बताया कि पतोरा, पहडोर और भरर पंचायतों के जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाई गई आपत्तियों के आधार पर यह मुद्दा सामने आया है। ऐसे में इसे सामाजिक विवाद का रूप देना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।
उन्होंने वर्तमान तहसील अध्यक्ष और उनके समर्थकों पर निशाना साधते हुए कहा कि समाज के मुद्दों को राजनीतिक रंग देकर अनावश्यक रूप से विवाद को बढ़ाया जा रहा है। “समाज को जोड़ने के बजाय तोड़ने का प्रयास बेहद चिंताजनक है,” उन्होंने कहा। उनके अनुसार, सामाजिक संगठनों की जिम्मेदारी समाज को एकजुट रखने की होती है, न कि उसे विभाजित करने की।
पूर्व अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि पंचायत सचिव महेंद्र साहू के खिलाफ मामला अभी प्रशासनिक जांच के अधीन है और अंतिम निर्णय आना बाकी है। ऐसे में बिना जांच पूरी हुए किसी को क्लीन चिट देना या दूसरों पर आरोप लगाना न केवल अनुचित है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया के भी विपरीत है।
दिनेश साहू ने सामाजिक पदों की गरिमा का जिक्र करते हुए कहा कि जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों को बिना तथ्यों की पुष्टि किए सार्वजनिक बयान देने से बचना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सामाजिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को अलग-अलग नजरिए से समझना जरूरी है, क्योंकि दोनों को मिलाकर देखने से भ्रम की स्थिति पैदा होती है।
अंत में उन्होंने समाज के सभी वर्गों से अपील की कि वे अफवाहों और एकतरफा बयानबाजी से दूर रहें तथा प्रशासनिक जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर विश्वास बनाए रखें, ताकि समाज की एकता, सौहार्द और गरिमा अक्षुण्ण बनी रहे।
