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डबल एरियर लेने वाले शिक्षकों की हो रही आयुक्त कोष लेखा से जांच - NN81


लोकेशन/ आगर मालवा 

संवादाता संजय डगवाल 

अधिकांश का सरनेम एक जैसा उज्जैन और आगर मालवा दो जिलो के 7-8  अधिकारियों और शिक्षकों की जांच चल रही है। आयुक्त कोष एवं लेखा भोपाल से जारी पत्र क्रमांक SFIC/CN8 26245/233 दिनांक 16.10.2025 से जारी पत्र के बाद शिक्षकों के खाते की जांच शुरू हो गई है। पत्र के अनुसार जिला आगर मालवा में आगर विकासखंड शिक्षा विभाग में पदस्थ मोहनलाल सिसौदिया के खाते मे 4427069 रूपये , पोपसिंह राठोर के खाते में 4478963 रूपये , भारत सिंह राठोर के खाते में 4548564 रूपये, सरिता राठोर के खाते में 3481489, गजराज सिंह राठौर के खाते में 55787 रूपये श्रीपाल सिंह राठौर के खाते में 736678 रूपये वेतन समेत डाले गये। लाखों रूपये का अधिक वेतन जारी होने के बाद ग्वालियर टीम ने इसे पकड़ा और भोपाल के अधिकारियों को बताया। मामला बहुत बड़ी आर्थिक अनियमितता का है। उज्जैन और आगर मालवा में शिक्षा विभाग के इन शिक्षकों को डबल एरियर का भुगतान हर महीने होता रहा। यह आंकड़ा लाखों में है। संदिग्ध भुगतान 2510449 पकड़ में आया है। जबकि अभी जांच जारी है। अधिकांश शिक्षको का आंकड़ा 44 लाख के ऊपर है‌। अधिकांश शिक्षको का एक ही सरनेम है राठौर।  यह प्रक्रिया 5-6 सालों तक चली। बड़ी बात यह है कि इसे ग्वालियर के अधिकारियों ने ही पकड़ा है। ऐसी स्थिति दो से अधिक जिलों में हुई है। बड़ी बात यह‌ है कि 2018 से 2024-25 तक के  5-6 सालों में जब तक खाते में पैसे आते रहे तब तक तो तो मारसाब ने डबल तनख़ा का आनंद लिया। अपने अधिकारियो साथियों को कुछ नहीं बताया और जब 3-4 महीने से तनख़ा आना बंद हुई। तो मारसाब आवेदन लेकर विभिन्न कार्यालयो में घूम रहे हैं। मारसाब कह रहे हैं कि उनको कुछ नहीं पता। जांच अधिकारी कह रहे हैं कि यह सब आहरण वितरण अधिकारी की लिप्तता से हुआ। खैर अब रिकवरी की तैयारी हो गई है। बड़नगर में आईटीआई कालेज के पूर्व प्रशिक्षण अधिकारी पर भी ऐसे ही आरोप है। वो 2005 के बाद भर्ती हुए पर चूंकि वे खुद ही तनख़ा बांटने और बिल लगाने वाले थे। इसलिए उनहोने पेंशन वाली तनख़ा का लाभ ले लिया। जबकि 2005 के बाद से पेंशन बंद है। मामले की फिलहाल हाई प्रोफाइल जांच चल रही है। जानकार बताते हैं कि ऐसा इसलिए भी हो रहा है कि कोई अधिकारी मृत अधिकारी कर्मचारी के खाते को अपने नाम पर ट्रांसफर कर ले या उसके मोबाइल नंबर को अपने अकाउंट से लिंक कर दे तो भी ऐसा हो सकता है। एक अन्य कारण यह भी बताया जा रहा है कि कई बार अधिकारीयो का ट्रांसफर हो जाता है लेकिन तनख़ा पुरानी पदस्थापना वाली जगह से ही निकलती रहती है फिर चुपके से नई जगह से भी मोबाइल नंबर बदल कर या पहचान का प्रमाण बदलने से भी कंप्यूटर सिस्टम पहचान नही पता है। फिलहाल सभी से बड़ी रिकवरी की तैयारी चल रही है। अन्य जिलों में भी ऐसी जांचें चल रही है

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