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बीएसपी एवं रावघाट प्रबंधन को लेकर राजाराव बूढ़ादेव गोद ग्राम विकास समिति रावघाट का अनिश्चितकालीन धरना प्रारंभ - NN81




लोकेशन नारायणपुर छत्तीसगढ़ 

संवाददाता खुमेश यादव 


नारायणपुर - 21अप्रैल 2026//नारायणपुर जिला में भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन एवं रावघाट माइंस द्वारा लगातार की जा रही वादा खिलाफी  को लेकर प्रभावित गांवों के ग्रामीणों में बढ़ता असंतोष अब खुलकर सामने आ गया है। आज तेलसी मोड़ क्षेत्र में राजाराव बूढ़ादेव गोद ग्राम विकास समिति रावघाट के बैनर तले ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन शुरू करते हुए अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन प्रारंभ कर दिया है। आंदोलन को परिवहन संघ और विभिन्न श्रमिक संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है। 

राजाराव बूढ़ादेव गोद ग्राम विकास समिति रावघाट के पदाधिकारियों एवं प्रभावित ग्रामीणों का आरोप है कि रावघाट क्षेत्र में खनन कार्य शुरू करने से पहले भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) द्वारा खदान शुरू होने के समय करीब 900 स्थानीय युवाओं को रोजगार देने का आश्वासन दिया गया था, जबकि अब तक लगभग 180 लोगों को ही काम मिल पाया है।  उन्होंने मांग की है कि रावघाट प्रभावित क्षेत्र के स्थानीय युवाओं को बीएसपी, माइनिंग कंपनियों और परिवहन कंपनियों में 100 प्रतिशत रोजगार कोटा दिया जाए। साथ ही बीएसपी और सेल की स्थायी भर्तियों में 10 प्रतिशत पद आरक्षित कर पहले प्रभावित गांवों, उसके बाद आसपास के गांवों और फिर जिले के अन्य युवाओं को प्राथमिकता दी जाए। इसके अलावा सीएसआर और डीएमएफ फंड के माध्यम से स्थानीय युवक-युवतियों को नर्सिंग, आईटीआई, ड्राइविंग और माइनिंग से जुड़े प्रशिक्षण देकर हर वर्ष 100 से 200 युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई है।

ग्रामीणों ने पर्यावरणीय नुकसान को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि माइंस से निकलने वाला “लाल पानी” खेतों और जल स्रोतों में मिल रहा है, जिससे कृषि भूमि प्रभावित हो रही है और लोगों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है। इसके साथ ही ग्राम सभाओं की अनुमति और वन अधिकार कानून के पालन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। उनका कहना है कि डीएमएफ की 70 प्रतिशत राशि सीधे प्रभावित ग्राम पंचायतों के विकास में खर्च की जाए और इसकी मासिक आय-व्यय रिपोर्ट समिति को लिखित रूप में दी जाए। साथ ही आगामी एक वर्ष की विस्तृत कार्ययोजना सार्वजनिक की जाए तथा क्षेत्र में डीएवी स्कूल और अस्पताल के निर्माण के लिए निगरानी समिति गठित कर जल्द निर्माण कार्य शुरू किया जाए।

परिवहन व्यवस्था को लेकर भी वाहन मालिकों और ट्रांसपोर्टरों ने कई मांगें रखी हैं। इनमें रावघाट से अंतागढ़ तक सड़क परिवहन दर प्रति टन 910 रुपये निर्धारित करने, परिवहन का भुगतान हर माह की 5 तारीख तक सुनिश्चित करने तथा देरी होने पर 18 प्रतिशत ब्याज देने की मांग शामिल है। इसके अलावा रेल परिवहन शुरू होने के बाद भी सड़क मार्ग से कम से कम 40 प्रतिशत खनिज परिवहन जारी रखने और डीजल दरों के अनुसार परिवहन भाड़े में वार्षिक वृद्धि की मांग भी की गई है।श्रमिकों और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को भी आंदोलन में प्रमुखता दी गई है। ग्रामीणों ने श्रमिकों को न्यूनतम वेतन के साथ VDA, PF, ESIC, ओवरटाइम, मेडिकल अलाउंस, बीमा, यात्रा भत्ता, हाउसिंग भत्ता और बोनस जैसे सभी वैधानिक लाभ सुनिश्चित करने तथा हर माह की 7 तारीख तक वेतन भुगतान करने की मांग की है। साथ ही मृतक परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति देने और स्थानीय आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के वेतन का भुगतान बीएसपी द्वारा किए जाने की मांग भी उठाई गई है।

प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों का  स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और स्पष्ट कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा।

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