नरसिंहपुर–गाडरवारा–बनखेड़ी–पिपरिया (स्टेट हाईवे क्रमांक 22) पर हाल ही में लगाए गए ब्रेकर रिफ्लेक्टर पट्टियों और साइड रिफ्लेक्टर की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
गाडरवारा से कामती-आमगांव तिराहा, साईंखेड़ा (हाईवे 44 टर्निंग), तथा ग्राम नांदनेर के मोड़ पर लगाए गए रिफ्लेक्टर और ब्रेकर पट्टियां महज 3–4 दिनों में ही उखड़ने लगी हैं।
🔎 स्थिति चिंताजनक क्यों है?🙏
रिफ्लेक्टर पट्टियां केवल खीलों से ठोकी गई थीं, जो अब उखड़ चुकी हैं।
सड़क पर निकले हुए खीले वाहनों के टायरों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
कई जगह रिफ्लेक्टर निकलकर अलग हो गए हैं, केवल प्लास्टिक ढांचा बचा है।
ब्रेकर पट्टियां भी ढीली होकर उखड़ रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जब 3–4 दिन में यह हाल है, तो आगे इनकी टिकाऊ क्षमता पर प्रश्नचिन्ह लगना स्वाभाविक है।
⚠️ मुख्य सवाल यह है:👇
क्या केवल औपचारिकता निभाने के लिए कार्य किया गया?
क्या गुणवत्ता जांच और तकनीकी मानकों का पालन हुआ?
स्टेट हाईवे 22 पर पहले से ही:
साइड शोल्डर अधूरे हैं,
गड्ढों की मरम्मत नहीं हुई,
किनारों की झाड़ियां नहीं हटाई जातीं,
जिसके कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं।
👉 सिर्फ रिफ्लेक्टर और ब्रेकर पट्टी लगा देने से सड़क सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती।
जरूरत है मजबूत, टिकाऊ और मानक अनुरूप कार्य की, साथ ही नियमित निगरानी की।
📢 संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में तत्काल जांच कर गुणवत्ता सुधार सुनिश्चित करें, ताकि दुर्घटनाओं पर प्रभावी रोक लग सके।
न्यूज़ नेशन 81 जिला नरसिंहपुर से राजा जाटव की खबर
