शाहपुरा/बिजौलिया
बिजौलिया थाना क्षेत्र में वरिष्ठ पत्रकार श्याम विजय पर हुए जानलेवा हमले के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। घटना के विरोध में कस्बे के पत्रकारों ने एकजुट होकर प्रशासन को 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। पत्रकारों ने मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार ललित डीडवानिया को ज्ञापन सौंपते हुए मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने के साथ ही फरार आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया कि 1 अप्रैल 2026 की रात करीब 9.10 बजे पत्रकार श्याम विजय पर उनके घर के बाहर कुछ बदमाशों ने रास्ता रोककर हमला कर दिया। आरोपियों ने उनके साथ मारपीट की और उनके गले से करीब 30 ग्राम सोने की चेन तथा 11 हजार रुपए नकद लूट लिए। घटना के बाद पीड़ित ने थाना बिजौलिया में मामला दर्ज कराया, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की।
पत्रकारों ने पुलिस की प्रारंभिक कार्रवाई को सराहनीय बताते हुए कहा कि एक नामजद आरोपी सहित दो लोगों को हिरासत में लिया जाना सकारात्मक कदम है, लेकिन अभी भी कई आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। विशेष रूप से नगर पालिका में कार्यरत संविदा कर्मचारी योगेश अहीर का नाम सामने आने के बावजूद उसकी गिरफ्तारी नहीं होना सवाल खड़े कर रहा है।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव के चलते पुलिस शेष आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं कर पा रही है। इससे न केवल पत्रकारों में आक्रोश है, बल्कि आमजन में भी भय का माहौल बना हुआ है। पत्रकारों ने कहा कि आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, जिससे कानून व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है।
प्रेस ट्रस्ट बिजौलिया ने इस घटना को लोकतंत्र के चैथे स्तंभ पर सीधा हमला बताते हुए कहा कि यदि पत्रकार ही सुरक्षित नहीं रहेंगे तो समाज में सच सामने लाना कठिन हो जाएगा। संगठन ने मांग की है कि मामले की पारदर्शी जांच करवाई जाए, सभी आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए, संबंधित नगर पालिका कर्मचारी को कार्यमुक्त किया जाए और पीड़ित पत्रकार को सुरक्षा प्रदान की जाए। इसके साथ ही पत्रकारों ने सरकार से पत्रकारों की सुरक्षा के लिए ठोस नीति बनाने की भी मांग उठाई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
पत्रकारों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि 72 घंटे के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो प्रेस ट्रस्ट बिजौलिया के बैनर तले नगर पालिका बिजौलियां चैक पर धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्र में कानून व्यवस्था और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन तय समय सीमा के भीतर क्या कदम उठाता है और पत्रकारों की मांगों पर कितना खरा उतरता है।
