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पद्मश्री विभूषित गुरुदेव का भीलवाड़ा आगमन पूरे क्षेत्र के लिए सौभाग्य - कोठारी - NN81



न्यूज़ रिपोर्टर देवकरण माली

भीलवाड़ा के चित्तौड़ रोड स्थित होटल द व्हाइट सीजन्स में भगवान महावीर की परम उज्ज्वल पाट परंपरा में वल्लभ सूरी समुदाय के वर्तमान गच्छाधिपति और आत्म वल्लभ समुद्र इंद्रदिन्न सूरी के यशस्वी पट्टधर, पद्मश्री विभूषित शांतिदूत आचार्य भगवंत श्रीमद् विजय नित्यानंद सूरीश्वर म.सा. का अल्प प्रवास हुआ।

           आचार्य नित्यानंद सूरीश्वर म.सा. होटल मालिक और श्वेतांबर स्थानकवासी जैन नानक श्रावक समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा जीतो के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष संपतराज चपलोत के आमंत्रण पर यहां पहुंचे थे। 

        गुरुदेव के दर्शन के लिए भीलवाड़ा सांसद दामोदर अग्रवाल, भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी, गुलाबपुरा के समाजसेवी मिलापचंद्र चपलोत, संपतराज चपलोत, समाजसेवी और आरसीएम ग्रुप के उद्योगपति प्रकाश छाबड़ा, कांतिलाल जैन, सुनील जागेटिया, संदीप सिंघवी, सुभाष गाडोदिया, यूएस व्यास सहित बड़ी संख्या में जिले भर से श्रद्धालु पहुंचे और आशीर्वाद प्राप्त किया।

    विधायक कोठारी ने कहा कि गुरुदेव का भीलवाड़ा आगमन पूरे क्षेत्र के लिए सौभाग्य का विषय है। उनके संदेश से समाज में धर्म, संस्कृति और संयम की भावना सुदृढ़ होती है। उन्होंने आचार्य श्री को भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किए जाने को जैन समाज सहित पूरे देश के लिए गर्व का विषय बताया।

विधायक कोठारी ने कहा कि गुरुदेव के सानिध्य से क्षेत्र में आध्यात्मिक चेतना का संचार हुआ है, जो जनमानस को सकारात्मक दिशा प्रदान करेगा। उन्होंने कामना की कि गुरुदेव का आशीर्वाद सदैव क्षेत्रवासियों पर बना रहे और समाज में सुख-शांति एवं समृद्धि का वातावरण कायम हो।

      इस अवसर पर गुरुदेव के शिष्य मुनि मोक्षानंद विजय ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी की श्रमण परंपरा तप, त्याग, संयम और वैराग्य की मजबूत नींव पर आधारित है। इसी परंपरा में गच्छाधिपति आचार्य नित्यानंद सूरीश्वर म.सा. ने मात्र नौ वर्ष की अल्प आयु में सपरिवार जैन दीक्षा ग्रहण की और तब से आत्मकल्याण व लोककल्याण के मार्ग पर निरंतर अग्रसर हैं। जैन संतों का संपूर्ण जीवन कठोर संयम और चर्या में बीतता है और वे जहां भी जाते हैं पदयात्रा से ही यात्रा करते हैं। गुरुदेव अब तक अपने संयमकाल में लगभग पौने दो लाख किलोमीटर की पदयात्रा पूरे भारत में कर चुके हैं। पिछले वर्ष नागौर में उनका चातुर्मास संपन्न हुआ था, जबकि इस वर्ष उनका चातुर्मास बैंगलोर में प्रस्तावित है।

              मुनि मोक्षानंद विजय ने कहा कि विहार के दौरान गुरुदेव ने विजयनगर-गुलाबपुरा के समीप केसरिया धाम तीर्थ में 14 मार्च को दो जिन मंदिरों की प्रतिष्ठा करवाई। इनमें एक प्रतिमा लगभग 600 वर्ष प्राचीन और दूसरी करीब 900 वर्ष प्राचीन बताई जाती है।  भीलवाड़ा प्रवास के बाद गुरुदेव चित्तौड़गढ़ की ओर विहार कर रहे हैं। वहां जैनाचार्य हरिभद्र सूरीश्वर की जन्मभूमि चित्तौड़ में दर्शन करेंगे और किले स्थित जैन मंदिरों की यात्रा करेंगे। इसके बाद गुरुदेव उदयपुर, केसरियाजी, बड़ौदा, भरूच और झगड़िया होते हुए सूरत पहुंचेंगे। झगड़िया में 14 और 15 अप्रैल को महामांगलिक कार्यक्रम आयोजित होगा, जबकि सूरत के बलेश्वर तीर्थ में 20 अप्रैल को अक्षय तृतीया पर वर्षी तप के पारणों का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके बाद गुरुदेव मुंबई, पुणे होते हुए कर्नाटक की ओर विहार करेंगे और 19 जुलाई 2026 को बैंगलोर में उनका ऐतिहासिक चातुर्मासिक प्रवेश होगा। पिछले वर्ष ही भारत सरकार के द्वारा पूज्य गुरुदेव को पद्मश्री के अलंकरण से भी अलंकृत किया गया है जो जैन समाज के लिए एक गौरव की बात है।

            मुनि मोक्षानंद विजय ने यह भी कहा कि गुरुदेव के लोककल्याणकारी कार्यों को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया है, जो पूरे जैन समाज के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि गुरुदेव का आगमन समाज और क्षेत्र के लिए मंगलकारी है और उनके संदेश से लोग धर्म, संस्कृति, सदाचार और संयम की राह पर चलने के लिए प्रेरित होते हैं।

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