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“किसानों का सब्र टूटा: उमरिया में भारतीय किसान संघ का हाईवे जाम का ऐलान, 42 गांव उतरेंगे सड़क पर” - NN81



उमरिया। जिले में किसानों की समस्याओं को लेकर अब माहौल गरमाने लगा है। भारतीय किसान संघ ने प्रशासन की लगातार अनदेखी से नाराज होकर आंदोलन का रास्ता चुन लिया है। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो शहडोल-घुनघुटी हाईवे को पूरी तरह जाम कर दिया जाएगा।


भारतीय किसान संघ जिला अध्यक्ष अभिषेक अग्रवाल के नेतृत्व में कई बार  कलेक्टर उमरिया को विभिन्न समस्याओं को लेकर ज्ञापन सौंपा गया था। इसके बाद प्रथम स्मरण पत्र कलेक्टर को और द्वितीय स्मरण पत्र आयुक्त शहडोल संभाग को दिया गया, लेकिन अब तक किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई।


संघ का आरोप है कि प्रशासन किसानों की समस्याओं को लेकर पूरी तरह उदासीन बना हुआ है। एक ओर जहां प्रदेश सरकार किसानों के हित में योजनाओं और घोषणाओं की बात करती है, वहीं दूसरी ओर उमरिया जिला प्रशासन इन समस्याओं से आंखें मूंदे बैठा है।


किसान संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि कई बार प्रशासन से चर्चा और बैठक के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन हर बार उन्हें नजरअंदाज किया गया। इससे किसानों में गहरा आक्रोश है।


हाईवे जाम और अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी


भारतीय किसान संघ ने ऐलान किया है कि अब “घेरा डालो, डेरा डालो” आंदोलन के तहत शहडोल-घुनघुटी हाईवे को पूरी तरह बंद किया जाएगा। इस आंदोलन में 42 गांवों के किसान शामिल होंगे, जो सड़क पर ही रहकर खाना-पीना और डेरा डालेंगे।


संघ ने साफ कर दिया है कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक किसानों की मांगें पूरी नहीं हो जातीं। आंदोलन के दौरान किसी भी प्रकार की स्थिति के लिए पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


प्रशासन पर गंभीर आरोप


किसान संघ ने प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि अधिकारी किसानों की समस्याएं सुनने के बजाय ठेकेदारों और कंपनियों को खुश करने में लगे हैं। विभागों के अधिकारी कंपनी एवं ठेकदार से मिले हुए है, यही कारण है कि बार-बार अवगत कराने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं किया जा रहा।


भारतीय किसान संघ ने स्पष्ट किया है कि देश के सबसे बड़े संगठन में से है, जिले के सभी ग्रामों में किसानों की समितियां हैं, किसानों को कमजोर समझना शासन की भूल है, किसान खेत में कार्य करता है तो उसे खेत में ही कार्य करने दे, प्रशासन किसानों को रोड में आने के लिए मजबूर ना करें, किसान अगर पूरे विश्व का पेट भरना जानता है तो अपने अधिकारियों के लिए लड़ना भी जानता है ।

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