अमरोहा। विनियमित क्षेत्र कार्यालय से एक महत्वपूर्ण पत्रावली के गायब होने का मामला सामने आने के बाद उपजिलाधिकारी सदर का कार्यालय सवालों के घेरे में आ गया है। हैरानी की बात यह है कि लगभग आठ माह बीत जाने के बावजूद पत्रावली गुम होने के संबंध में न तो कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया गया और न ही जिम्मेदारों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई की गई।
विनियमित क्षेत्र अमरोहा के अवर अभियंता की जांच रिपोर्ट के आधार पर नियत प्राधिकारी, विनियमित क्षेत्र अमरोहा के कार्यालय में आरबीओ एक्ट की धारा 10 के तहत एक वाद दर्ज किया गया था। उक्त वाद की पत्रावली सुनवाई के लिए कार्यालय में लंबित रही। शिकायतकर्ता पिछले तीन वर्षों से उपजिलाधिकारी सदर के न्यायालय में अपने अधिवक्ता के माध्यम से मुकदमे की पैरवी करती रहीं, लेकिन इस दौरान न तो वाद का निस्तारण किया गया और न ही कोई अंतिम आदेश पारित हुआ।
शिकायतकर्ता द्वारा जब पत्रावली में एक प्रार्थना पत्र दिया गया तो कार्यालय की ओर से बताया गया कि संबंधित पत्रावली उपलब्ध नहीं है और वह गायब हो चुकी है। इस पर शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से कई बार शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि विभागीय मिलीभगत से अनुचित लाभ लेने के उद्देश्य से पत्रावली को गायब या नष्ट किया गया है, ताकि कोई प्रतिकूल आदेश पारित न हो सके।
शिकायतकर्ता का कहना है कि सरकारी कार्यालय से सरकारी अभिलेखों का गायब होना गंभीर मामला है, जिसकी जवाबदेही संबंधित कार्यालय और कर्मचारियों की बनती है। इसके बावजूद उपजिलाधिकारी सदर शैलेश दुबे द्वारा अब तक न तो पत्रावली गायब होने के संबंध में कोई एफआईआर दर्ज कराई गई है और न ही कोई विधिक कार्रवाई की गई है। पूर्व में उपजिलाधिकारी ने पत्रावली ढूंढने के लिए 15 दिन का समय मांगा था, लेकिन वह अवधि भी बीत चुकी है।
उधर, आरटीआई एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष पं. मनु शर्मा एडवोकेट द्वारा इस प्रकरण से संबंधित दाखिल की गई आरटीआई भी एसडीएम सदर कार्यालय में लंबित है, जिसका आज तक कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। इसे लेकर भी प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिकायतकर्ता और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि प्रभावशाली लोगों की शिकायतों पर जहां त्वरित कार्रवाई की जाती है, वहीं इस मामले में लगातार टालमटोल रवैया अपनाया जा रहा है। पत्रावली गायब होने और कार्रवाई न होने से एसडीएम सदर कार्यालय की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गया है।
