बांसुरी की तान, मांदल की थाप और पारंपरिक वेशभूषा के साथ आदिवासी समाज रातातलाई हाट में उतरा।
आदिवासी समाज का सबसे प्रमुख भगोरिया पर्व में व्यापारियों ने बताया कि प्रतिवर्ष अनुसार इस वर्ष भी बड़ी संख्या में लोग भंगोरिया हाट में आए और रंग गुलाल सहित जलेबी भजिया की खूब बिक्री देखने को मिली.l
और पारंपरिक पर्व भगोरिया इन दिनों अपने पूरे शबाब पर है. जिलेभर में उत्सव की मस्ती बिखरने लगी है.
बांसुरी की मधुर तान और मांदल की गूंजती थाप पर थिरकते कदम, रंग-बिरंगे परिधानों में सजे लोग और मेलों की चहल-पहल ने पूरे जिले को उत्सव नगरी में बदल दिया है.
लगभग एक सप्ताह तक चलने वाले इस उत्सव में संस्कृति, परंपरा और उमंग का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है.
मोतिलाल गोयल
