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संवाददाता खुमेश यादव
एनएच-130डी कोंडागांव से नारायणपुर, कुतुल होते हुए महाराष्ट्र सीमा तक जोड़ेगा
नारायणपुर, 31 जनवरी 2026 // मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने दो दिवसीय नारायणपुर प्रवास के दौरान नारायणपुर–कोंडागांव मार्ग पर गढ़बेंगाल घोटुल के समीप निर्माणाधीन राष्ट्रीय राजमार्ग का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि सड़क निर्माण कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण किया जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। निरीक्षण के समय राजस्व मंत्री श्री टंकराम वर्मा, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, बस्तर संभाग आयुक्त श्री डोमन सिंह, आईजी श्री सुन्दरराज पी., कलेक्टर श्रीमती नम्रता जैन तथा पुलिस अधीक्षक श्री रॉबिन्सन गुरिया उपस्थित रहे।
डबल इंजन सरकार में बस्तर के विकास को गति
डबल इंजन सरकार के तहत बस्तर अंचल में विकास कार्यों को गति दी जा रही है। इसी क्रम में महाराष्ट्र से बस्तर को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी के निर्माण को राज्य सरकार ने प्राथमिकता दी है। लगभग 195 किलोमीटर लंबा यह मार्ग एनएच-30 का शाखा मार्ग है, जो कोंडागांव से प्रारंभ होकर नारायणपुर और कुतुल होते हुए महाराष्ट्र सीमा स्थित नेलांगुर तक जाता है। आगे महाराष्ट्र में यह मार्ग बिंगुंडा, लहरे, धोदराज, भमरगढ़, हेमा और लकासा होते हुए आलापल्ली पहुंचता है, जहां यह एनएच-353डी से जुड़ता है।
छत्तीसगढ़ में इस राष्ट्रीय राजमार्ग का लगभग 122 किलोमीटर हिस्सा आता है। कोंडागांव से नारायणपुर तक करीब 50 किलोमीटर का भाग निर्माणाधीन है, जबकि नारायणपुर से कुतुल लगभग 50 किलोमीटर तथा कुतुल से नेलांगुर लगभग 21.5 किलोमीटर की दूरी है। सड़क के पूर्ण होने से बस्तर अंचल को महाराष्ट्र से सीधा और मजबूत सड़क संपर्क मिलेगा। इससे व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित एवं सुगम आवागमन सुनिश्चित होगा।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्ग 130-डी केवल एक सड़क नहीं बल्कि बस्तर की प्रगति का मार्ग है। सरकार इस परियोजना को तेजी से पूर्ण करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इस सड़क से स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और यह छत्तीसगढ़ तथा महाराष्ट्र को जोड़ने के साथ बस्तर के सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की गति तेज करने की दिशा में यह परियोजना मील का पत्थर साबित होगी।
