अमरोहा। जनपद के तहसील धनौरा क्षेत्र से भूमि विवाद का एक मामला सामने आया है, जिसमें पीड़ित ने राजस्व न्यायालयों से आदेश होने के बावजूद अपनी जमीन पर दखल न मिल पाने का आरोप लगाया है। पीड़ित का कहना है कि विपक्षीगण अवैध हथकंडे अपनाकर न्यायिक आदेशों को निष्प्रभावी बना रहे हैं।
पीड़ित के अनुसार, ग्राम गजरौला स्थित भूमि गाटा संख्या 261, रकबा 0.3640 हेक्टेयर में वह आधे हिस्से (1/2 भाग) का स्वामी है। प्रार्थी का नाम संबंधित राजस्व अभिलेखों में दर्ज है। आरोप है कि अन्य सहखातेदार शेष आधे हिस्से को अवैध रूप से अलग-अलग व्यक्तियों को विक्रय कर प्रार्थी की भूमि पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं।
अपनी संपत्ति की सुरक्षा के लिए प्रार्थी ने परगनाधिकारी धनौरा की अदालत में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 116 के अंतर्गत भूमि विभाजन का वाद दाखिल किया था। इस वाद में प्रारंभिक डिक्री की कार्रवाई पूर्ण होने के बाद अंतिम डिक्री भी पारित हो चुकी है। अंतिम डिक्री में प्रार्थी के 1/2 भाग का अलग कुर्रा निर्धारित किया गया है, जिसे कुर्रा संख्या-1 के रूप में लाल रंग से दर्शाया गया है।
पीड़ित का कहना है कि परगनाधिकारी का यह आदेश अपर आयुक्त द्वितीय मंडल मुरादाबाद द्वारा भी पुष्टि किया जा चुका है, जबकि विपक्षीगण की अपील खारिज हो चुकी है। इसके बाद भी विपक्षियों द्वारा उच्च न्यायालय या किसी अन्य न्यायालय से कोई स्थगन आदेश प्राप्त नहीं किया गया है। इसके बावजूद वे तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर प्रार्थी को उसके निर्धारित कुर्रे पर दखल नहीं लेने दे रहे हैं।
पीड़ित ने बताया कि इससे पहले भी वह 1 मार्च 2025 को संपूर्ण समाधान दिवस धनौरा में जिलाधिकारी के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर चुका है, लेकिन उस पर भी कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। अब एक बार फिर पीड़ित ने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व न्यायालयों के आदेशों का अनुपालन कराते हुए उसे उसकी भूमि पर दखल दिलाया जाए।
मामले ने प्रशासनिक अमल और न्यायिक आदेशों के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
