न्यूज़ रिपोर्टर देवकरण माली
भीलवाड़ा = पीएम श्री राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय, बापूनगर भीलवाड़ा में दिनांक 04 फरवरी 2026 को वार्षिक उत्सव “नवोत्कर्ष” का भव्य आयोजन हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि शंकर लाल माली (वरिष्ठ शिक्षाविद), विशिष्ट अतिथि कैलाश सुथार (अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी), लव कुमार जोशी (पार्षद वार्ड नं. 9) तथा विद्यालय के एसडीएमसी सदस्यों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया।
इस अवसर पर विद्यालय की छात्राओं ने “एक भारत श्रेष्ठ भारत” की थीम पर आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। रंगारंग कार्यक्रमों में विद्यार्थियों की रचनात्मकता, अनुशासन और आत्मविश्वास ने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया।
विद्यालय की प्रधानाचार्य सुनीता नानकानी ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए विद्यालय की शैक्षणिक एवं सह-शैक्षणिक उपलब्धियों पर प्रकाश डाला तथा विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अभिभावकों के सहयोग की सराहना की।
मुख्य अतिथि शंकर लाल माली ने अपने संबोधन में छात्राओं की प्रतिभा की प्रशंसा करते हुए कहा कि “भारत को जानो, भारत को मानो, भारत के बनो और भारत को बनाओ” जैसे प्रेरक विचारों के माध्यम से राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को देश के लिए सदैव तत्पर रहने हेतु प्रेरित किया।
कार्यक्रम में बोर्ड परीक्षा में सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाली छात्राओं, पद्माक्षी पुरस्कार प्राप्त छात्राओं, राष्ट्रीय स्तर पर चयनित नेटबॉल व बॉक्सिंग की छात्राओं, तथा वर्षभर विद्यालय की विभिन्न गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को पुरस्कार प्रदान किए गए।
कार्यक्रम में विधायक अशोक कोठारी के प्रतिनिधि के रूप में मनोज कुमार शर्मा (विभाग प्रचारक, चित्तौड़) सहित सत्यनारायण गूगड़, सुनीता स्वर्णकार, प्रशांत परमार, विवेक निमावत, दिनेश सुथार, बाबूलाल टांक, गजेंद्र सिंह, संजय राठी, एसडीएमसी सदस्य लक्ष्मण सिंह राठौड़, लाडो सेवा फाउंडेशन अध्यक्ष, सुमित्रा वैष्णव, हंसा पारीक, लक्ष्मीनारायण जोशी (योग गुरु), सुषमा बिश्नोई सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन सुनीता जोशी द्वारा किया गया। इसके पश्चात कक्षा 12वीं की छात्राओं के लिए विदाई समारोह आयोजित किया गया, जिसमें उन्हें बोर्ड परीक्षाओं की सफलता एवं उज्ज्वल भविष्य हेतु शुभकामनाएं दी गईं। कार्यक्रम के अंत में व्याख्याता स्नेहलता सनाढ्य ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
