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विवेकानंद केंद्र ने वैदिक गार्डन में तीन श्रेणियों के लिए किया विमर्श कार्यक्रम का आयोजन: NN81

 

न्यूज़ रिपोर्टर देवकरण माली

भीलवाड़ा।

विवेकानंद केंद्र द्वारा कुमुद विहार प्रथम स्थित वैदिक गार्डन में तीन अलग-अलग श्रेणियों के लिए विमर्श कार्यक्रमों का आयोजन संपन्न हुआ। यह कार्यक्रम सेवा, शिक्षा और योग क्षेत्र में कार्यरत व्यक्तियों के लिए आयोजित किए गए।

कार्यक्रम को तीन भागों में आयोजित किया गया—

सेवा कार्यों में लगे उद्योगपति, चिकित्सक एवं प्रोफेशनल व्यक्तियों हेतु

शिक्षा क्षेत्र में कार्य कर रहे व्यक्तियों हेतु

योग क्षेत्र में कार्य कर रहे योग शिक्षकों हेतु

सेवा विमर्श में पद्मश्री निवेदिता रघुनाथ भिड़े का मार्गदर्शन

सेवा क्षेत्र के विमर्श कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पद्मश्री निवेदिता रघुनाथ भिड़े ने मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने कहा कि सेवा चार प्रकार की होती है, जिन्हें दो वर्गों में बांटा जा सकता है— मूर्त सेवा और अमूर्त सेवा।

उन्होंने बताया कि मूर्त सेवा भौतिक रूप से दिखाई देती है, जबकि अमूर्त सेवा दिखाई नहीं देती, लेकिन यह अधिक श्रेष्ठ होती है क्योंकि यह भाव प्रधान होती है। अमूर्त सेवा के माध्यम से ऐसा समाज बनाया जा सकता है जिसमें मूर्त सेवा की आवश्यकता ही नहीं रहे।

इस विमर्श में विशिष्ट अतिथि के रूप में तिलोक चंद छाबड़ा एवं दिनेश नौलखा उपस्थित रहे। तिलोक चंद छाबड़ा ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पूरे मन से कार्य करने का संकल्प लेता है तो परिवर्तन निश्चित होता है, और यदि सभी मिलकर प्रयास करें तो समाज में बड़ा सकारात्मक बदलाव संभव है।

केंद्र परिचय डॉ. जी. वी. दिवाकर ने प्रस्तुत किया, आभार बलराज आचार्य ने व्यक्त किया तथा संचालन सत्यम शर्मा ने किया।

शिक्षाविदों के विमर्श में मूल्यपरक शिक्षा पर चर्चा

शिक्षा क्षेत्र के विमर्श कार्यक्रम में वक्ता के रूप में माननीय भानुदास धाक्रस, जनजातीय प्रकल्प में कार्यरत जगदीश जोशी, पूर्वांचल क्षेत्र में शिक्षा कार्य कर रही मीरा दीदी एवं सुजाता दीदी उपस्थित रहे।

वक्ताओं ने वर्तमान परिप्रेक्ष्य में विद्यार्थियों को मूल्यपरक शिक्षा देने, माता-पिता व परिवार से जुड़ाव, गुरु-शिष्य संबंधों की पवित्रता तथा असम के चाय बागान क्षेत्रों में उपेक्षित जनजातीय क्षेत्रों में आनंदालय प्रकल्प की सफलता जैसे विषयों पर जानकारी दी।

इस कार्यक्रम में भीलवाड़ा के वरिष्ठ प्रधानाचार्य एवं शिक्षा अधिकारी विजयपाल वर्मा, नरेंद्र सिंह राठौड़, विवेक सक्सेना, सुंदर सिंह चुंडावत एवं देवीलाल प्रजापत सहित अनेक शिक्षाविद उपस्थित रहे।

योग शिक्षकों के विमर्श में तनाव को बताया सभी रोगों की जड़

योग शिक्षकों के विमर्श कार्यक्रम में मुख्य वक्ता माननीय एम. हनुमंत राव रहे। उन्होंने योग के नियमित अभ्यास द्वारा मन को निर्मल करने और मन की वृत्तियों को शांत करने की प्रक्रिया को समझाया।

उन्होंने बताया कि नींद भी एक वृत्ति है तथा तनाव ही सभी व्याधियों की जड़ है। इस विषय पर उन्होंने कई व्यावहारिक उदाहरण देकर उपस्थित योग शिक्षकों का मार्गदर्शन किया।

कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी राजयोग संस्थान से ललिता बहिन, अनिता बहिन, विशाखा बहिन, गायत्री शक्तिपीठ से श्रंग सुखवाल, बिहार योग विद्यालय से उमाशंकर, हार्टफुलनेस से अभिषेक नाराणीवाल सहित अनेक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। मंच संचालन शिवनारायण जांगिड़ ने किया। गीत पूजा बैरवा ने प्रस्तुत किया, विवेक वाणी धीरज शर्मा ने दी तथा केंद्र परिचय रवि भाम्बी ने दिया।

कई गणमान्य नागरिक रहे मौजूद

कार्यक्रम में विवेकानंद केंद्र के अखिल भारतीय कोषाध्यक्ष प्रवीण दाभोलकर, अखिल भारतीय संयुक्त सचिव रेखा दवे, किशोर टोकेकर, प्रांत संचालक शकुंतला डाड, प्रांत प्रमुख भगवान सिंह चौहान, प्रांत संगठक शीतल जोशी, पूर्व सांसद सुभाष बहेड़िया, वरिष्ठ उद्योगपति शांतिलाल पानगड़िया, रवि जाजू सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे

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