राजस्थान
राजसमन्द जिला दुग्ध संघ के प्रबंध संचालक अनिल कुमार बराला के विरूद्ध गम्भीर भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितता तथा मनमानी के आरोप लगाते हुए दुग्ध संघ के अध्यक्ष एवं संचालक मण्डल सदस्यों द्वारा जयपुर में प्रमुख शासन सचिव, डेयरी एवं पशुपालन विभाग तथा आरसीडीएफ की सीएमडी, जीएम कृषक संगठन एवं वित्तीय सलाहकार से मिलकर लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई।
शिकायत में बताया गया कि नियमानुसार प्रत्येक तीन माह में होने वाली संचालक मण्डल की बैठक को प्रबंध संचालक अनिल कुमार बराला द्वारा जानबूझकर विलंबित किया गया। अन्ततः दिनांक 10/11/2025 को बैठक बुलाई गई, लेकिन बैठक की कार्यवाही जो कि 48 घंटों में समस्त संचालक मण्डल सदस्यों एवं संबंधित विभागों को भेजी जानी चाहिए थी, वह आज तक प्रेषित नहीं की गई। साथ ही संचालक मण्डल द्वारा पारित निर्णयों की अनिल कुमार बराला द्वारा खुली अवहेलना की गई।
शिकायत में यह भी गम्भीर आरोप लगाया गया कि दुग्ध मार्गों पर परिवहन कर रहे टैंकरों के अनुबंध समाप्त होने के बाद भी उन्हें एक वर्ष का अवैध कार्यादेश जारी किये गये, जिनकी दर 28.18 रुपये प्रति किलोमीटर थी। अगस्त माह में संघ द्वारा अन्य दो दुग्ध मार्गों पर 14.85 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से अनुबंध किये गये थे। इन कम दर के अनुबंधकों को प्रबंध संचालक अनिल कुमार बराला द्वारा डरा-धमका कर तथा अनैतिक वसूली निकाल कर इन अनुबंधों को स्वैच्छिक रूप से निरस्त करवाया गया एवं पुनः अधिक परिवहन दर 28.18 रू प्रतिकिलोमीटर पर अपने चहेते ठेकेदार से अनुबंध किया गया, जिससे संघ को लगभग 60 लाख से अधिक सालाना नुकसान हो रहा है जो कि दुग्ध उत्पादकों के हितों पर सीधा कुठाराघात है।
इस के अतिरिक्त मुख्यमंत्री सम्बल योजना में भी गम्भीर अनैतिकता सामने आई है। शिकायत के अनुसार प्रबंध संचालक ने स्वयं जिम्मेदार पद पर रहते हुए विशेष समिति के दुग्धदाता के स्थान पर अपने स्वयं के बैंक खाता नम्बर जोड़ दिये, जिससे वास्तविक दुग्धदाताओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता की हानि हुई। यह प्रबंध संचालक के खुले भ्रष्टाचार को दर्शाता है।
उपरोक्त सभी तथ्यों पर अधिकारियों द्वारा सरकार की Zero Tolerance Policy अपनाते हुये प्रकरण को गम्भीरता से लिया एवं शीघ्र ही प्रबंध संचालक अनिल कुमार बराला के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही का आश्वासन दिया गया है। साथ ही संचालक मण्डल सदस्यों द्वारा चेतावनी दी गई है कि यदि शीघ्र कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई तो विवशतापूर्ण दुग्ध उत्पादकों द्वारा दुग्ध संकलन कार्य बंद कर दिया जावेंगा, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी आरसीडीएफ जयपुर एवं शासन की होगी।
