Type Here to Get Search Results !

🔴LIVE TV

कांकेर जिले में 193 हेक्टेयर में रोपण पूर्ण, आगामी वर्षों में 300 हेक्टेयर का लक्ष्य - NN81


 समाचार

ऑयल पाम खेती के लिए राज्य शासन देगा अतिरिक्त टॉप-अप अनुदान

खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता और किसानों की दीर्घकालीन आय वृद्धि है मुख्य उद्देश्य


उत्तर बस्तर कांकेर, 06 जनवरी 2026/ खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता के राष्ट्रीय लक्ष्य को साकार करने तथा कृषकों की आय में दीर्घकालीन और स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करने के उद्देश्य से केंद्र एवं राज्य शासन द्वारा संयुक्त रूप से नेशनल मिशन ऑन एडीबल ऑयल, ऑयल पाम योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत ऑयल पाम की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए जहां केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित अनुदान दिया जा रहा है। वहीं राज्य शासन द्वारा इसके अतिरिक्त विभिन्न घटकों में अतिरिक्त (टॉप-अप) अनुदान प्रदान किया जा रहा है, जिससे किसानों को इस दीर्घकालीन फसल को अपनाने के लिए प्रेरणा मिल सके।

ऑयल पाम एक दीर्घकालीन, कम श्रम एवं अधिक उत्पादकता देने वाली तिलहन फसल है। इसमें रोग-प्रकोप की संभावना न्यूनतम रहती है तथा अन्य फसलों की तुलना में इसकी देखरेख अपेक्षाकृत आसान होती है। एक बार रोपण करने के बाद चौथे वर्ष से इसका उत्पादन प्रारंभ हो जाता है और 25 से 30 वर्षों तक निरंतर उपज प्राप्त की जा सकती है। यह फसल पारंपरिक तिलहन फसलों की तुलना में प्रति हेक्टेयर 4 से 6 गुना अधिक तेल उत्पादन क्षमता रखती है, जिससे कृषकों को लंबे समय तक स्थायी आर्थिक लाभ प्राप्त होता है।

उद्यान के सहायक संचालक ने बताया कि जिले के विकासखंड कांकेर, नरहरपुर, चारामा, दुर्गूकोंदल, भानुप्रतापपुर, अंतागढ़ एवं कोयलीबेड़ा में ऑयल पाम रोपण को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्ष 2024-25 में जिले में 45 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम का रोपण किया गया, जबकि वर्ष 2025-26 में 148 हेक्टेयर क्षेत्र में रोपण किया गया है। इस प्रकार अब तक 193 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑयल पाम रोपण किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त जिले में आगामी अवधि के लिए 300 हेक्टेयर और क्षेत्र में ऑयल पाम रोपण का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है। ऑयल पाम की खेती में अधिक प्रारंभिक लागत एवं 3 से 4 वर्ष की गेस्टेशन अवधि को ध्यान में रखते हुए राज्य शासन द्वारा केंद्र सरकार के न्यूनतम 01 लाख 30 हजार  रुपये प्रति हेक्टेयर अनुदान के अतिरिक्त टॉप-अप अनुदान का प्रावधान किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य किसान प्रारंभिक वर्षों में आर्थिक दबाव महसूस किए बिना इस फसल को अपनाएं।

राज्य शासन द्वारा रखरखाव मद में पूर्व में दिए जा रहे 5,250 रुपये प्रति हेक्टेयर के अनुदान में 1,500 रुपये की वृद्धि करते हुए इसे 6,750 रुपये प्रति हेक्टेयर कर दिया गया है। इसी प्रकार अंतरवर्तीय फसलों के लिए अतिरिक्त वृद्धि के साथ 10,250 रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। ड्रिप सिंचाई प्रणाली अपनाने वाले कृषकों को 8,835 रुपये की अतिरिक्त राशि सहित कुल 22,765 रुपये का अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा पौधों एवं अंतरवर्तीय फसलों को जानवरों से सुरक्षा प्रदान करने हेतु फेंसिंग के लिए 54,485 रुपये प्रति हेक्टेयर का अनुदान भी दिया जा रहा है। इस प्रकार राज्य शासन द्वारा रखरखाव, अंतरवर्तीय फसल, ड्रिप सिंचाई एवं फेंसिंग मद में कुल 69,620 रुपये तक का अतिरिक्त टॉप-अप अनुदान केवल ऑयल पाम रोपण करने वाले कृषकों को प्रदान किया जा रहा है। योजना से संबंधित अधिक जानकारी, तकनीकी मार्गदर्शन एवं लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया के लिए कृषक भाई-बहन उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों एवं अधिकृत प्रतिनिधि कंपनी से संपर्क कर सकते हैं।

टीप :-दुर्गूकोंदल विकासखण्ड के ग्राम कोंडरूज के किसान द्वारा ऑयल पाम पौधरोपण फोटो।

संवाददाता - विक्रम सिंह भण्डारी 

     अंतागढ़ जिला कांकेर छत्तीसगढ़। 

(पी आर ओ की खबर है)

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

Top Post Ad

Advertisement

#codes