परभणी (शांतीलाल शर्मा )
ज़िलेके ताडकळस गाव के पालम स्टेट हाईवे पर एक गुल फैक्ट्री है। इस फैक्ट्री से निकलने वाला काला धुआं अब इलाके के लोगों के लिए गंभीर समस्या बनता जा रहा है। कुछ सालों से यह फैक्ट्री पुराने जूते-चप्पल जलाने का इस्तेमाल कर रही है।
इस ज़हरीले धुएं से सांस की बीमारियां हो रही हैं और खेती और पर्यावरण पर बुरा असर पड़ रहा है। ईस पहले फैक्ट्री में (गन्ने के डंठल और पत्ते) जलाकर गुड़ बनाया जाता था, लेकिन पिछले साल से एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है कि पुराने जूते-चप्पल ट्रकों की मदद से डंपिंग ग्राउंड से फैक्ट्री में लाए जा रहे हैं और जलाए जा रहे हैं।
ईस फॅक्ट्री से निकलने वाली गैसों और धुएं के हिस्सों का नुकसानदायक असर 40 मीटर तक हो सकता है, जबकि इससे निकलने वाला धुआं और गैसें हवा की दिशा में एक या दो किलोमीटर तक असर पड सकती हैं। फैक्ट्री एरिया से 12 किलोमीटर ऊपर तक धुएं में मौजूद बारीक कणों के एटमॉस्फियर में रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस ज़हरीली गैस से वर्कर्स और आस-पास के लोगों को सांस की बीमारियां, कैंसर और चक्कर आना, थकान जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है। इस धुएं में बड़ी मात्रा में कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डायऑक्साइड के साथ-साथ के बारीक कण और कैडमियम और क्रोमियम जैसे खतरनाक मेटल होते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ये ज़हरीले कण सीधे गन्ने के जूस और बनने वाले सिरप में मिल जाते हैं, जिससे गुड़ की क्वालिटी भी खराब होती है। लोकल लोग और एनवायरनमेंट एक्टिविस्ट फैक्ट्री के खिलाफ तुरंत रेगुलेटरी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
