लोकेशन नारायणपुर छत्तीसगढ़
संवाददाता खुमेश यादव
नारायणपुर : नारायणपुर पुलिस द्वारा नक्सल मुक्त सशक्त बस्तर की कल्पना को साकार रूप देने हेतु क्षेत्र में लगातार नक्सल विरोधी ‘‘माड़ बचाओ’’ अभियान संचालित किया जा रहा है। साथ ही अबूझमाड़ में लगातार नवीन कैम्प स्थापित करते हुए सड़क पुल-पुलिया निर्माण सहित अन्य जन कल्याणकारी योजनाओं को अंदरूनी गांव तक पहुंचाये जाने में सहयोग प्रदान किया जा रहा है।
इसी कड़ी में थाना ओरछा के ग्राम धोबे क्षेत्र में नक्सल विरोधी अभियानों एवं ओरछा -आदेर – लंका एक्सिस तक सड़क निर्माण कार्य में सुरक्षा प्रदान करने एवं विकास कार्यो में सहयोग पहुंचाने के उद्देश्य से आज दिनांक 15 -11-2025 को नारायणपुर पुलिस ने घोर नक्सल प्रभावित माड़ क्षेत्र माओवादियों के आश्रय स्थल ग्राम धोबे में नवीन कैम्प स्थापित किया गया है। ग्राम धोबे में नवीन कैम्प स्थापित होने से क्षेत्र के ग्रामीणों में काफी उत्साह एवं सुरक्षा का माहौल बना हुआ है। नवीन कैम्प तोके थाना ओरछा क्षेत्रान्तर्गत स्थित है तथा थाना ओरछा से 23किलोमीटर, आदेर से 20 किलोमीटर, कुड़मेल से 10किलोमीटर और और जाटलूर से 5किलोमीटेर किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
धोबे में नवीन कैम्प स्थापित होने से आसपास क्षेत्र में सड़क, पुल-पुलिया, शिक्षा, चिकित्सा, मोबाईल नेटवर्क कनेक्टिविटी एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं का तेजी से विस्तार होगा। अब क्षेत्र में सुरक्षा के निगरानी में सड़क निर्माण सहित अन्य सुविधाओं को आम जनता तक पहुंचाये जाने में सहयोग प्रदान किया जायेगा।
नारायणपुर पुलिस ने वर्ष 2025 में नक्सलियों के अघोषित राजधानी कुतुल सहित नक्सलियों के आश्रयस्थल कोडलियर, बेडमाकोटी, पदमकोट, कान्दुलपार, नेलांगूर, पांगूड, रायनार, एडजुम, ईदवाया, आदेर, कुड़मेल, कोंगे, सितरम, तोके, जाटलूर और धोबे में कैम्प खोली है।
पी. सुन्दराज पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज जगदलपुर, अमित कांबले (भा.पु.से.) पुलिस उप महानिरीक्षक कांकेर रेंज कांकेर, रोबिनसन गुरिया पुलिस अधीक्षक नारायणपुर, आईटीबीपी 44वी वाहिनी कमांडेंट मुकेश कुमार दसमाना, संदीप पटेल (सेनानी 16वी बटालियन सी.ए.एफ), अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अक्षय सबद्रा, अजय कुमार, सुशील कुमार नायक, संजय महादेवा, उप पुलिस अधीक्षक अभिषेक केसरी, मनोज मंडावी, अविनाश कंवर, कुलदीप बंजारे और अजय कुमार सिंह के नेतृत्व एवं निर्देशन में नवीन कैम्प स्थापना में नारायणपुर डीआरजी, बस्तर फॉईटर एवं आईटीबीपी 27वी वाहिनी, 38वी वाहिनी, 40वी वाहिनी और 44वी वाहिनी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
