हरदा। हरदा जिले के वनांचल क्षेत्रों में, जहाँ शिक्षा अक्सर एक चुनौती बनकर सामने आती है, वहाँ के शिक्षक अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण से छात्रों के भविष्य को नई दिशा दे रहे हैं। हमारे संवाददाता अनिल मालवीय ने ऐसे ही कुछ शिक्षकों से बात की, जिनके प्रयास शिक्षा की एक नई तस्वीर पेश कर रहे हैं।
खिरकिया बीआरसी के अंतर्गत आने वाली प्राथमिक शाला बासीगढ़ सिराली तहसील से लगभग 30 किलोमीटर दूर एक दूरस्थ गाँव में स्थित है। यहाँ शिक्षकों की कमी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद, शिक्षक हार नहीं मानते। वे न केवल बच्चों को पढ़ाते हैं, बल्कि उन्हें जीवन के महत्वपूर्ण सबक भी सिखाते हैं।
ज्ञान के साथ संस्कारों की भी शिक्षा
शिक्षकों का मानना है कि शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ साक्षरता हासिल करना नहीं, बल्कि छात्रों को एक अच्छा इंसान बनाना भी है। उनका लक्ष्य है कि उनके छात्र केवल पढ़े-लिखे ही नहीं, बल्कि जिम्मेदार और अच्छे नागरिक भी बनें। इस सोच के साथ, वे किताबी ज्ञान के अलावा नैतिकता, अनुशासन और सामाजिक मूल्यों की शिक्षा भी देते हैं।
"हर घर दस्तक" से बच्चों को स्कूल लाने की पहल
ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों का स्कूल से दूर रहना एक आम समस्या है। इस चुनौती का सामना करने के लिए, ये शिक्षक एक अनूठी पहल कर रहे हैं। वे केवल स्कूल में बैठकर बच्चों का इंतजार नहीं करते, बल्कि घर-घर जाकर उन बच्चों को ढूंढते हैं, जो स्कूल नहीं आ पाते। वे माता-पिता को शिक्षा का महत्व समझाते हैं और बच्चों को स्कूल लाने के लिए प्रेरित करते हैं।
इन शिक्षकों का यह निस्वार्थ प्रयास न केवल बच्चों की उपस्थिति में सुधार ला रहा है, बल्कि उनके जीवन में आशा की एक नई किरण भी जगा रहा है। यह दिखाता है कि मजबूत इरादों और सच्ची लगन से कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।
