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सीहोर में अक्षय तृतीया पर त्यागी बाबा का 131 वां जन्मोत्सव मनाया गया : NN81

 पत्रकार आनंद अग्रवाल जिला ब्यूरो 




सीहोर में अक्षय तृतीया पर त्यागी बाबा का 131 वां जन्मोत्सव मनाया गया



सीहोर,। अक्षय तृतीया पर ब्रहमलीन संत श्रीश्री 1008 श्री त्यागी बाबा का 131 वां जन्मोत्सव श्रीरामकुटी आश्रम में उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मानस पाठ, सत्संग प्रवचन कई कार्यक्रमों में पूरे जिले भर के श्रद्धालु भक्तों ने हिस्सा लिया और संत श्री का पुण्य स्मरण किया। संतश्री को 56 भोग का नैवेद्य अर्पित किया गया। इस अवसर पर महाआरती एवं भण्डारे का भी आयोजन किया गया।

अक्षय तृतीया पर सीहोर रेलवे स्टेषन रोड पर स्थित ब्रहमलीन संत श्रीश्री 1008 श्री त्यागी बाबा का जन्मोत्सव हर वर्ष श्रद्धालु भक्तों द्वारा उत्साह के साथ मनाया जाता है, इस वर्ष भी संतश्री के जन्मोत्सव पर श्री रामकुटी आश्रम पर अनेक धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया इसमें प्रातः मानस पाठ का आयोजन किया गया, तत्पष्चात उनके कृपापात्र षिष्य मानस मर्मज्ञ सुप्रसिद्ध श्रीरामकथा वाचक श्रीश्री 1008 श्री उद्धवदास जी त्यागी महाराज के श्रीमुख से प्रातः 10 बजे से सत्संग प्रवचन का आयोजन हुआ। प्रवचन के पष्चात महाआरती का आयोजन किया गया। इस अवसर पर दोपहर 12 बजे से भण्डारे का आयोजन किया गया जिसमें बडी संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने प्रसादी ग्रहण की। उल्लेखनीय है कि संतश्री त्यागी बाबा के सीहोर सहित आसपास के जिलों में प्रभु सीताराम जी को ईष्ट रूप में स्वीकार करने वाले बडी संख्या में षिष्य हैं। शहर के रेलवे स्टेषन रोड पर स्थित त्यागी बाबा आश्रम जिसे रामकुटी आश्रम के नाम से जाना जाता है यहां श्री सीताराम जी की मनमोहक प्रतिमाएं विराजमान है, आश्रम प्रांगण में श्री हनुमानजी, उमापति महादेव जी, मारकण्डेय महादेव की प्रतिमाएं मंदिर में विराजित हैं। आश्रम प्रांगण में एक कुंआ भी है जिसे संतश्री त्यागी बाबा ने अकेले ही श्रम करके निर्मित किया था। सीहोर में त्यागी बाबा आश्रम श्रद्धालुओं की एक चिरपरिचित स्थली है जहां जाने से ही तन-मन में परम शांति का अनुभव होता है। आश्रम के पवित्र वातावरण में अनेक बाल साधु भी हैं जो धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन एवं षिक्षा दीक्षा ग्रहण कर रहे हैं। प्रतिदिन यहां बडी संख्या में श्रद्धालु जनों का आना-जाना लगा रहता है। सुदूरवर्ती गांवों से भी भक्त संतश्री की समाधि का दर्षन करने आश्रम में आते हैं। आज भी संतश्री की समाधि से श्रद्धालुजनों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

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