खबर: डी.ए-वी कॉलेज कानपुर में आईसीआर द्वारा अनुदानित अल्पकालीन अनुभवजन्य शोध परियोजना के निष्कर्ष के प्रसार हेतु एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया
गुरुवार को डी.ए-वी कॉलेज कानपुर में आईसीआर द्वारा अनुदानित अल्पकालीन अनुभवजन्य शोध परियोजना के निष्कर्ष के प्रसार हेतु एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व उच्च शिक्षा राज्यमंत्री श्रीमती नीलिमा कटियार, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झाँसी के प्रो. पुनीत बिसारिया, प्राचार्य अरुण कुमार दीक्षित, हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. रेनू दीक्षित रहीं। इस दौरान नीलिमा कटियार ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय भाषाओं कला एवं संस्कृति का संवर्धन न केवल राष्ट्र बल्कि व्यक्तियों के लिए भी महत्वपूर्ण है और भाषा, कला तथा संस्कृति को अभिन्न रूप से जोड़ती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत ही भाषाओं के अस्तित्व के संकट को न केवल पहचान गया है अपितु उसे दूर करने का सफल प्रयास भी किया गया है।
मुख्य वक्ता प्रो. पुनीत बिसरिया ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति भाषा, कला व संस्कृति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर मात्र चिंता ही व्यक्त नहीं करती बल्कि इस नीति के माध्यम से वह भाषा कला और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन हेतु ईमानदार प्रयास भी करती है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के 22 वें अनुच्छेद में मातृभाषा में शिक्षण पर बल दिया जाना इसी का परिणाम है।
प्राचार्य प्रो. अरूण कुमार दीक्षित ने परियोजना कार्य की सफलता व निष्कर्षों की सराहना करते हुए सभी शिक्षकों व शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया।
डॉ. यतीन्द्र सिंह ने परियोजना के विषय व निष्कर्ष पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति एवं सर्वेक्षण अनुभव सभी के साथ साझा किए और क्रियान्वयन को और अधिक प्रभावशाली बनाने हेतु सुझाव भी प्रस्तुत किए। हर सहाय पी.जी. कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अमर श्रीवस्तव व आर्मापुर पी.जी. कॉलेज के प्राचार्य प्रो. मुकेश कुमार ने परियोजना कार्य की सराहना करते हुए सभी को बधाई दी। डॉ. दीप्ति सक्सेना, डॉ. सुनील कुमार, प्रो. दया दीक्षित, डॉ. रश्मि सूद, डॉ. राधा, डॉ. प्रदीप सहित सैंकड़ों शोधार्थी उपस्थित रहे।
संवाददाता: प्रवीण त्रिपाठी,कानपुर नगर




