छत्तीसगढ़ पोड़ी उपरोड़ा
नानक राजपूत
स्लग :- शहीद चंद्रशेखर आजाद जि के पुण्य तिथि व बलिदान दिवस पर ग्राम तुमान मे श्रद्धांजली
अर्पित
आज शहीद चंद्रशेखर आज़ाद जी के पुण्यतिथि व बलिदान दिवस पर ग्राम तुमान के प्राचीन शिव मंदिर में सामुहिक श्रद्धांजलि दी गई, दो मिनट के मौन के बाद राष्ट्रगान का सामुहिक गायन किया गया।
दरसल चन्द्रशेखर आज़ाद ने मृत्यु दण्ड पाये तीनों प्रमुख क्रान्तिकारियों की सजा कम कराने का काफी प्रयास किया। वे उत्तर प्रदेश की हरदोई जेल में जाकर गणेश शंकर विद्यार्थी से मिले। विद्यार्थी से परामर्श कर वे इलाहबाद गये और 20 फ़रवरी को जवाहर लाल नेहरू से उनके निवास आनंद भवन में भेंट की। आजाद ने पण्डित नेहरू से यह आग्रह किया कि वे गाँधी जि पर लॉर्ड इरविन से इन तीनों की फाँसी को उम्र- कैद में बदलवाने के लिये जोर डालें। अल्फ्रेड पार्क में अपने एक मित्र सुखदेव राज से बात कर ही रहे थे तभी सीआईडी का एसएसपी नॉट बाबर जीप से वहाँ आ पहुँचा। उसके पीछे-पीछे भारी संख्या में कर्नलगंज थाने से पुलिस भी आ गयी। फिर दोनों ओर से हुई भयंकर गोलीबारी में आजाद ने तीन पुलिस कर्मियों को मौत के घाट उतार दिया और कई अंग्रेज़ सैनिक घायल हो गए। अंत में जब उनकी बंदूक में एक ही गोली बची तो वो गोली उन्होंने खुद को मार ली और वीरगति को प्राप्त हो गए। यह दुखद घटना 27 फ़रवरी 1931 के दिन घटित हुई और हमेशा के लिये इतिहास में दर्ज हो गयी। और पुलिस ने बिना किसी को इसकी सूचना दिये चन्द्रशेखर आज़ाद का अन्तिम संस्कार कर दिया था। जैसे ही आजाद की बलिदान की खबर जनता को लगी सारा प्रयाग राज अलफ्रेड पार्क में उमड पडा। जिस वृक्ष के नीचे आजाद शहीद हुए थे लोग उस वृक्ष की पूजा करने लगे। आज उन्ही को याद करते हुए देश के कोने कोने मे शहरी क्षेत्रो के साथ साथ ग्रामीण क्षेत्रो मे श्रद्धांजली अर्पित कि गई।

