पाकुड़िया प्रखंड सहित आसपास के क्षेत्रों में सनातन धर्म का प्रमुख त्योहार रथ यात्रा (रथ पूजा) पूरे हर्षोल्लास और पारंपरिक श्रद्धाभाव के साथ मनाया गया। इस पावन अवसर पर भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा की विशेष पूजा-अर्चना की गई, जिसके बाद एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस अलौकिक दृश्य के साक्षी बनने के लिए क्षेत्र से भारी संख्या में श्रद्धालु पाकुड़िया पहुंचे।
सुबह से ही क्षेत्र के विभिन्न मंदिरों में वैदिक मंत्रोचार के साथ भगवान जगन्नाथ की विशेष महाआरती और पूजा का आयोजन किया गया। पुरोहितों द्वारा विधि-विधान से पूजा संपन्न कराने के बाद महाप्रभु जगन्नाथ, देवी सुभद्रा और बलभद्र जी के विग्रहों को जयकारों के बीच रथ पर विराजमान कराया गया। जैसे ही भगवान रथ पर सवार हुए, पूरा वातावरण 'जय जगन्नाथ' और 'हरे कृष्णा' के शंखनाद और जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
इसके बाद शुरू हुई भव्य शोभायात्रा, जो नगर के मुख्य मार्गों से होकर गुजरी। इस दौरान रथ खींचने के लिए श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा गया। सनातन परंपरा में यह मान्यता है कि रथ खींचने से अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है और पुण्य की प्राप्ति होती है, इसी आस्था के साथ महिला, पुरुष, बुजुर्ग और बच्चों ने बढ़-चढ़कर रथ की रस्सी थामी। रास्ते भर श्रद्धालुओं द्वारा भगवान को फल, मिठाई और छप्पन भोग का प्रसाद अर्पित किया गया।
शोभायात्रा के मार्ग में सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर स्थानीय प्रशासन भी मुस्तैद नजर आया। जगह-जगह पर पेयजल और सेवा शिविर लगाए गए थे, जहां स्वयंसेवकों ने श्रद्धालुओं की सेवा की। इस धार्मिक उत्सव ने पूरे पाकुड़िया क्षेत्र को भक्तिमय माहौल में सराबोर कर दिया। महाप्रभु की इस पावन रथ यात्रा के शांतिपूर्ण और भव्य समापन पर पूजा समिति के सदस्यों ने सभी श्रद्धालुओं और प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।

